अज़ान व अकामत

अज़ान व अकामत

फ़र्ज़ नमाज़ो से पहले अज़ान देना सुन्नते मुअक्किदा है। जो शख़्स अज़ान दे, उसे चाहिए कि ऊँची जगह , क़िबला कि तरफ मुँह करके खडा हो, अपनी दोनो उंगलियो को कानों के दोनों सुराखो मे डाल कर बुलंद आवाज से अजान कहे। अजान के बाद जमाअत से पहले अकामत (तकबीर) कही जाती है। अक़ामात बिल्कुल अज़ान की तरह है बस चन्द बातों का फ़र्क है– 

  1. अक़ामत मे हय्य अलस्सलाह और हय्य अलल फलाह के बाद क़द क़ा- मतीस्सलाह कहे।

  2. अक़ामत अज़ान के मुक़ाबिले मे ज़रा पस्त आवाज़ से कहें।

  3. अक़ामत कहते वक़्त कानों के सुराखों में उंगलियाँ डालने की ज़रुरत नहीं।

अज़ान

अल्लाहु अक्बर अल्लाहु अक्बर (अल्लाह बहुत बड़ा है, अल्लाह बहुत बड़ा है)

अल्लाहु अक्बर अल्लाहु अक्बर (अल्लाह बहुत बड़ा है, अल्लाह बहुत बड़ा है)

अश्हदु अल-ला इ ला-ह इल्लल्लाह (मैं गवाही देता हूं की अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं)

अश्हदु अल-ला इ ला-ह इल्लल्लाह (मैं गवाही देता हूं की अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं)

अश्हदु अन-न मुहम्मदर-रसू-लुल्लाह (मैं गवाही देता हूं की हज़रत मुहम्मद {सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अल्लाह के रसूल हैं)

अश्हदु अन-न मुहम्मदर-रसू-लुल्लाह (मैं गवाही देता हूं की हज़रत मुहम्मद [सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम] अल्लाह के रसूल हैं)

हय-य अलस्सला: (आओ नमाज़ पढ़ने के लिए)

हय-य अलस्सला: (आओ नमाज़ पढ़ने के लिए)

हय-य अलल् फलाह (आओ निजात पाने के लिए)

हय-य अलल् फ़लाह (आओ निजात पाने के लिए)

अल्लाहु अक्बर अल्लाहु अक्बर (अल्लाह बहुत बड़ा है, अल्लाह बहुत बड़ा है)

ला इला-ह इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)

0 फ़ज्र की अज़ान में ‘हय-य अलल फ़लाह’ के बाद यह बढ़ा दिया जाता है।

अस्सलातु खैरुम मिनन्नौम (नमाज़ नींद से बेहतर है)

अस्सलातु खैरुम मिनन्नौम (नमाज़ नींद से बेहतर है)

0 जमाअत से पहले तक्बीर में ‘हय-य अलल फ़लाह’ के बाद यह बढ़ाया जाता है।

क़द क़ा-म-तिस्सलात (नमाज़ [की जमाअत] खड़ी हो गयी)

क़द का-म-तिस्सलात (नमाज़ [की जमाअत] खड़ी हो गयी)

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नमाज़ का तरीक़ा
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