मौत हो जाने पर

maut ho jane per

मौत हो जाने पर: जब आदमी मरने लगे तो उसको चित लिटाकर उसके पैर किल्ले की तरफ कर दो और सर ऊँचा कर दो और उसके पास बैठकर ज़ोर-जोर से कलिमा तैयबा वगैरह पढ़ो…

ईमान

iman

ईमान: ईमान दिल से मानने और ज़बान से इकरार करने को ईमान कहते हैं।
1. ईमाने मुज्मल
2. ईमाने मुफ़स्सल

नमाज़ में की जाने वाली कुछ ग़लतियाँ

namaz me ki jane wali kuch galtiya

नमाज़ में की जाने वाली कुछ ग़लतियाँ: नमाज़ के तरीके का सही इल्म न होने के कारण हम से नमाज़ में विभिन्न प्रकार की ग़लतियाँ होती रहती हैं। जिनमें से कुछ नीचे दी जा रही है।

शादी की रस्में

shadi ki rasme

शादी की रस्में: निकाह में जो चीजें फर्ज हैं, वे सिर्फ दो हैं- कम से कम दो गवाहों की मौजूदगी और ईजाब व कुबूल और निकाह का मस्तून तरीका यह है कि आम मज्मे में निकाह किया जाए। खुत्बा और छोहारे बाँटना । सुन्नत है, फर्ज वाजिब नहीं। सुहागरात के दूसरे दिन दावते वलीमा करना भी सुन्नत है और उसका तरीका

ज़कात सदका कुरबानी हज

sadka fitr or qurbani hujj

ज़कात​: जिस तरह नमाज़, रोज़ा औरतों पर फर्ज है, उसी तरह ज़कात भी फ़र्ज़ है। बहुत-सी औरतें ज़कात फर्ज होने के बावजूद, ज़कात अदा नहीं करतीं और गुनाहगार होती हैं।

जुमा

juma ki namaz

जुमा के दिन जुह के चार फ़र्जी के बजाए नमाज़ जुमा दोगाना अदा किया जाता है। जुमा की नमाज़ सिर्फ़ बड़ी मस्जिद में ही अदा की जा सकती है। हर मस्जिद में जुमा की नमाज़ पढ़ना मुनासिब नहीं।

मस्बूक

masbuq

मस्बूक़: एक या दो रक्अत के बाद जमाअत में शरीक होने वाला।​ जमाअत से नमाज़ पढ़ने के लिए आप मस्जिद में ऐसे वक़्त पहुंचे, जैसे अस्र की नमाज़ की एक या दो रक्अतें…

मुफ्सिदाते, मकरूहाते नमाज़

mufsidate maqruhate namaz

मुफ्सिदाते, मुस्तहब्बाते नमाज़​: इन चीज़ो के करने से नमाज़ फ़ासिद हो जाती है: बात करना: ख़्वाह थोड़ी हो या बहुत, कस्दन हो या भूल कर। ज़बान से सलाम करना या …

नमाज़ के फ़र्ज़

namaz-ke-farz

नमाज़ के फ़र्ज़​: वजू या गुस्ल, पाक कपड़े, पाक जगह…
नमाज़ के वाजिब: फ़र्ज़ नमाज़ों की पहली दो रक्अतों में किरात, फ़र्ज़ नमाज़ों की हर रक्त में सूर: फ़ातिहा पढ़ना

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