मय्यत क़ब्र में रखते वक़्त​

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मय्यत क़ब्र में रखते वक़्त

मय्यत को क़ब्र में रखते वक़्त यह पढ़े

बिस्मिल्लाहि व बिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाहि0

तर्जुमा- मैं इस को अल्लाह का नाम लेकर और अल्लाह की मदद के साथ और रसूलुल्लाह के मज़हब पर (क़ब्र में) रखता हूं।

फ़ायदा- दफ़्न के बाद क़ब्र के सिरहाने सूरः फ़ातिहा (यानी अल हम्दु) शरीफ़ और सूरः बक़रः की शुरू की आयतें ‘मुफ्लिहून’ तक पढ़ी जाएं और पैरों की तरफ़ सूरः बक़रः की आख़िरी आयतें ‘आ-म-नर्रसूलु’ से सूरः के ख़त्म तक पढ़ी जाएं। -मिश्कात

और थोड़ी देर क़ब्र के पास ठहर कर मय्यत के वास्ते इस्तग़फ़ार करें और अल्लाह तआला से इसके लिए दुआ करें कि उसे (फ़रिश्तों के सवाल व जवाब में) साबित क़दम रखे। -हिस्न

क़ब्र में मिट्टी डालने की दुआ

मिन्हा ख़लक़नाकुम वफीहा नुइदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा०

तर्जुमाः इसी से हमने पैदा किया और इसी में तुमको लौटायेंगे और इसी से दोबारा तुमको निकालेंगे।  

क़ब्र में 3 बार मिट्टी डालें। 

  • – पहली बार में मिन्हा ख़लक़नाकुम पढ़ें 

  • – दूसरी बार में वफीहा नुइदुकुम पढ़े 

  • – और तीसरी बार में वमिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रः पढ़े।

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