रूह निकलने पर​

रूह निकलने पर

रूह निकल जाने के बाद मय्यत की आंखें बन्द करके यह पढ़ें

अल्लाहुम-मगफ़िर्ली फुलानिव वर्फ़अ द-र-ज-त हू फ़िल महदीयीन वख्लुफ़्हु फ़ी अक़ि-बिही फ़िल ग़ाबिरीन वफ़िर लना व लहू- या रब्बल आ ल मी न वफ़्सह लहू फ़ी क़ब्रिही व नव्विर लहू फ़ीहिo 

तर्जुमा- ऐ अल्लाह! इसको बख़्श दे और (हिदायात पाने वालों में शामिल फ़रमा कर,) इस का दर्जा बुलंद फ़रमा और उस के वारिसों में तू उस का ख़लीफ़ा हो जा और ऐ रब्बुल आलमीन! हमें और इसे बख़्श दे और इस की क़ब्र को फैला और रोशन कर दे।

यह दुआ हुजुरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हजरत अबू सलमा रजि. की मौत के बाद उनकी आंखें बन्द फ़रमा कर पढ़ी थी और फुलानिन  की जगह उन का नाम लिया था। -मिश्कात (मुस्लिम)

जब कोई शख़्स किसी दूसरे मुसलमान के लिए यह दुआ पढ़े तो फुलानिन की जगह उस का नाम ले और नाम से पहले इ वाला ल लगा दे।

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