वजू : फ़र्ज़, वाजिब, सुन्नतें, मकरूहात, मुस्तहब्बात

वजू के फ़र्ज़

  • एक बार अच्छी तरह हर अंग को धोना, पूरा चेहरा धोना।
  • दोनों हाथ कुहनियों समेत धोना।
  • टखनों समेत दोनों पांव धोना।
  • चौथाई सर का मसह करना।

वजू के वाजिब

अंगूठी या छल्ला अगर तंग हो तो उसको घुमाना ताकि पानी उसके नीचे पहुंच जाये

वजू की सुन्नतें

  • नीयत करना, बिस्मिल्लाह पढ़ना।
  • तीन बार दोनों हाथ गट्ठों तक धोना।
  • तीन बार कुल्ली करना।
  • तीन बार नाक में पानी डालना।
  • सर का मसह करना।
  • दाढ़ी में खलाल करना, (ताकि कोई बाल सूखा न रह जाये)।
  • उंगलियों का खलाल करना।
  • कानों का मसह करना।
  • हर उज़्व को तीन बार धोना।
  • धोते वक़्त हाथ से मलना।
  • तर्तीब से वजू करना।
  • लगातार करना, यानी धोने में इतनी देर न करना कि जो उज़्व पहले धो लिया जा चुका है, वह सूख जाए।

वजू के मुस्तहब्बात

  • दाएं जानिब से शुरू करना।
  • गरदन पर मसह करना।
  • नमाज़ के वक़्त से पहले वजू करना।
  • क़िब्ले की तरफ रुख करके बैठना।
  • पाक और ऊंची जगह पर बैठ कर वजू करना।

वजू के मकरूहात

  • वजू करते वक़्त दुनिया की बातें करना।
  • ज्यादा पानी बहाना।
  • नापाक जगह पर वजू करना।
  • सीधे हाथ से नाक साफ़ करना।
  • सुन्नत के खिलाफ़ वजू करना।
  • हर उज़्व को तीन बार से ज्यादा धोना।

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नमाज़ का तरीक़ा
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