हज का तल्बिया

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हज का तल्बिया

लब्बैक अल्लाहुम-म लब्बैक-लब्बैक ला शरी-क लका लब्बैक. इन्नल हम-दवन्निअ-म-त ल-कवल-मुल-क ला शरी-क लक०

तर्जुमा- मैं हाज़िर हूं ऐ अल्लाह! मैं हाज़िर हूं, तेरा कोई शरीक नहीं है, मैं हाज़िर हूं। बेशक हम्द और नेमत तेरे ही लिए है और मुल्क भी तेरा ही है। तेरा कोई शरीक नहीं। -मिश्कात

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जो भी मुसलमान तलबिया पढ़ता है, तो जहां तक पूरब व पश्चिम है, उसके दाएं-बाएं हर पत्थर और हर पेड़ और मिट्टी का ढेला, ये सभी तलबिया पढ़ते हैं। -तिर्मिज़ी

फ़ायदा- तल्बिया से फ़ारिश होकर अल्लाह तआला से उसकी ख़ुशी और जन्नत का सवाल करे और दोज़ख़ से निजात पाने की दुआ मांगे। -मिश्कात

अराफ़ात में पढ़ने के लिए

तर्जुमा- कोई माबूद नहीं अल्लाह के सिवा, वह तंहा है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए मुल्क है और उसी के लिए हम्द है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह ! मेरे दिल में नूर कर दे और मेरे कानों में नूर कर दे और मेरी आंखों में नूर कर दे। ऐ अल्लाह! मेरा सीना खोल दे और मेरे कामों को आसान फ़रमा दे और मैं सीने के वस्वसों और कामों की बद-नज़्मी और क़ब्र के फ़ित्ने से तेरी पनाह चाहता हूं। ऐ अल्लाह ! मैं तेरी पनाह चाहता हूं उस चीज़ की बुराई से जो रात में दाख़िल होती है और उसकी बुराई से जो दिन में दाखिल होती है और उसकी बुराई से जिसे हवाएं लेकर चलती हैं।

तवाफ़ करते हुए

बैतुल्लाह शरीफ़ का तवाफ़ करते हुए पढ़े

सुब्हानल्लाहि वल् हम्दु लिल्लाहि व ला इला-ह इल्लल्लाहु वल्लाहु अक्बर व ला हौ-ल व ला कू-व-त इल्ला बिल्लाहि०

तर्जुमा- अल्लाह पाक है और मैं अल्लाह की हम्द बयान करता हूं और अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और अल्लाह सबसे बड़ा है और गुनाह से फ़ेरने की और नेकी पर लगाने की ताक़त बस अल्लाह ही को है। -मिश्कात (इब्ने माजा)

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