Dua-e-Ganj Ul Arsh

Dua-e-Ganj Ul Arsh with URDU translation

For Rizq & Wealth | Save from Magic & Evil Eye Enemy

One of the many beneficial dua. Dua Ganjul Arsh with Urdu Translation for Rizq and wealth and also Provide safety from magic, evil eye and enemies.

Dua-e-Ganjul Arsh is a lovely dua written in the admiration of ALLAH.

Some Benefits of Reciting Dua Ganjul Arsh :

  1. Blessings & Barakah and Increase in Sustenance.

  2. Getting Sustenance from Unseen and unknown sources.

  3. Getting victory over enemies.

  4. Safety from evil eye.

  5. The reciter will remain secured and protected from black magic.

Dua-e-Ganjul Arsh 1
Dua-e-Ganjul Arsh 2
Dua-e-Ganjul Arsh 3
Dua-e-Ganjul Arsh 4
Dua-e-Ganjul Arsh 5
Dua-e-Ganjul Arsh 6
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Dua-e-Ganjul Arsh 9
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Dua-e-Ganjul Arsh 11
Dua-e-Ganjul Arsh 12
Dua-e-Ganjul Arsh 13
Dua-e-Ganjul Arsh 14

दुआ-ए-गन्जुल्-अ़र्श हिंदी में

बुज़ुर्गाने दीन से मन्कूल दुआओं में से एक दुआ है।  जो बहुत ख़ूबसूरत दुआ है।  इसको पढ़ने में एक अजीब लुत्फ़ आता है। आप भी यह दुआ दुआ-ए-गन्जुल्-अ़र्श पढ़ें। अल्लाह का ज़िक्र करें और लुत्फ़ लें पढ़ें। 

बिस्मिल्लाह  हिर्रमान निर्रहीम

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् मलिकिल क़ुद्दुसि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् अज़िज़िल् ज़ब्बारी

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नर्रऊफिर्रहीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् गफूर्रिहीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् करीमिल् हक़ीमि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् क़विय्यिल् वफिय्यि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल्लतीफिल् खबीरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नस्स-मदिल् माबूदि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् ग़फुरिल् -वदुदि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् वकीलिल् कफीलि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नर्रकीबिल् हफ़ीज़ि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नद्दाइमिल् क़ाइमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् मुहयिल् मुमीति

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् हय्यिल् क़य्यूमि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् ख़ालिक़िल् बारी

ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् अलिय्यिल् अज़ीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् मुअमिनिल् मुहैमिनि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् वाहिदिल् अ-ह-दि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् हसीबिश्शहीदि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् हलीमिल् करीमि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् अव्वलिल् क़दीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् अव्वलिल् आखिरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नज़्ज़ाहिरिल् बातिनि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् कबीरिल् मु-त-आलि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् क़ाज़िल् हाजाति

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नर्रहमानिर्रहीमि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नर्रब्बिल  अरशिल् अज़ीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-न रब्बि-यल् अअला

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् बुरहानि-स्सुल्तानि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नस्समी अिल् बसीरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् वाहिदिल् क़ह्हारि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् अलीमिल् हकीमि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नस्सत्तारिल् गफ़्फ़ारि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नर्रहमानिद्दय्यानि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् कबीरिल् अक्बरि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् गफ़ूरिश्शकूरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् अज़ीमिल् अलीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् ज़िल् मुल्कि वल्-म-लकूति

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-न जिल् अ़िज़्ज़ति वल् अज़-मति

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् अ़लीमिल् अल्लामि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नश्शाफ़िल् काफ़ी

*ला इला-ह इल्लल्लाहु  सुबहा-नल् अ़ज़ीमिल् बाक़ी

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नस्स-मदिल् अहदि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-न रब्बिल् अरज़ि वस्समावाति

*ला इला-ह इल्लल्लाहु  सुबहा-न ख़ालिक़िल् मख़लूक़ाति

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-न मन् ख़-ल-क़ल्ले-ल वन्नहा-र

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् ख़ालिक़िर्राज़िक़ि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् फ़त्ताहिल् अ़लीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् अ़ज़ीज़िल् ग़निय्यि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-न ज़िल् है-बति वल् क़ुद-रति

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-न ज़िल् कि ब् रियाई वल् ज ब् रूति

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नस्सत्तारिल् अज़ीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् आलिमिल् ग़ैबि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् हमीदिल् मजीदि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्  हकीमिल् क़दीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्  क़ादिरिस्सत्तारि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् -नस्सत्तारिल् अलीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल् ग़निय्यिल् अज़ीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु     सुबहा-नल्  अ़ल्लामिस्सलामि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु  सुबहा-नल्  मलिकिन्नसीरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्  ग़निय्यिर्रह्मानि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्  क़रीबिल् ह-सनाति

*ला इला-ह इल्लल्लाहु  सुबहा-नल् वलिय्यिल् ह-सनाति

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नस्सबूरि स्सत्तारि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् ख़ालिक़िन्नूरी

*ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्. ग़निय्यिल् मोजिज़ि

ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् फ़ाज़िलिश्शकूरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् ग़निय्यिल् क़दीमि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् ज़िल् जलालिल्  मुबीनि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् ख़ालिस्रिल्  मुख़लिसि

ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् सादिक़िल् वअदि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् हक़्क़िल मुबीनि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् ज़िल् कुव्वतिल् मतीनि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् क़विय्यिल् अज़ीज़ि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् अल्लामिल् ग़ुयूबि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् हय्यिल्लज़ी ला यमूतु

ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-न सत्तारिल् उयूबि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् गुफ़रानिल् मु सत अ़ानि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् रब्बिल्  अ़ा लमी न

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा- नर्रहमानिस्सत्तारि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु  सुबहा-नर्रहीमिल् ग़फ़्फ़ारि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्  अज़ीज़िल् वह्हाबि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्  क़ादिरिल् मुक़-तदिरि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल्  ज़िल् गुफ़रानिल् हलीमि

ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् मालिकिल् मुल्कि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् बारियिल् मु-सव्विरि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् अज़ीज़िल् जब्बारि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्. जब्बारिल् मु-त-कब्बिरि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल्लाहि  अम्मा यासिफ़ू-न

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् कुद्दूसिस्सुब्बूहि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-न रब्बिल् मलाई-कति वर्रूही

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-न ज़िल्  आलाई वन्नअ्माइ

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   सुबहा-नल् मालिक़िल् मक़सूदि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    सुबहा-नल् हन्नानिल् मन्नानि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    आ-दमु सफ़िय्युल्लाहि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   नूहुन नजिय्युल्लाहि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    इब्राहीमु ख़लीलुल्लाहि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    इस्माइलु ज़बीहुल्लाहि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   मूसा कलीमुल्लाहि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    दावूदु ख़ली-फ़तुल्लाहि

ला इला-ह इल्लल्लाहु    इसा रुहुल्लाहि

*ला इला-ह इल्लल्लाहु   मुहम्मदुर्रसूलुल्लाही

सल्लल्लाहु अ़ला ख़ैरि  ख़ल्क़िही  वनूरि अ़ऱशिही अफ – ज़लिल् अन्बियाई वल् मुऱ-सली-न हबीबिन-न व सय्यिदिना व-स-नदिना व-शफ़ीअ़िना वमौलाना मुहम्मदिंव्व आलिही व- अस्हाबिही अज्-मअ़ीन्+बि-रहूमति-क या अर् ह मर्राहिमीन्

दुआ-ए-गन्जुल्-अ़र्श की फ़ज़ीलत

रिवायत हैं कि एक दिन हज़रत रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मस्जिद में तशरीफ रखते थे कि अचानक हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम आये ! और यह दुआ हज़रत सल्लल्लाहु अलेहि व सल्लम को तालीम फरमायी और इसकी बडी फजीलत और बर्कतें बयान कीं !

पढने वालो को लंबी सनदो के मुताला से बडी तक्लीफ होती है ! और उनका कीमती समय बर्बाद होता है ! इसलिये इस लंबी असनाद को ख़त्म कर के पढने वालों की अकीदत दिलचस्पी और मुहब्बतें इलाही पर छोड दिया जाता है !

और त्तबर्तक के तौर पर उसका निचोड लिख दिया जाता हैं ! कि हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम ने इसके जहाँ और फजाइल बयान फ़रमाये ! वहीं यह यह भी बताया कि इस मुबारक दुआ के पढने वालों को अल्लाह पाक तीन चीजें अता करेगा

  1. उसकी रोजी में बर्कत देगा
  2. उसको ग़ैब से रोजी देगा
  3. उसके दुश्मन आजिज और जलील रहेंगे।

और जो कोई इस दुआ को पढा करेगा या अपने पास रखेगा तो अल्लाह पाक की उस पर हर समय रहमत नाजिल हुआ करेगी ! और लड़ाई के मेदान में काफिरों के मुकाबले में विजय प्राप्त करेंगा !

सफ़र से अम्न-चैन, सलामती और गनीमत के साथ घर आयेगा ! इस दुआ की बर्कत से जादू और शेतान की बुराइयों और आसमान व जमीन की हर तरह की बलाओँ और मुसीबतों से महफ़ूज़ रहेगा !

अगर इस दुआ  को पहली बारिश के पानी से धो कर जादू किये हुवे को पिलाया जाये तो फायदा पहुँचेगा ! इसको लिखकर और धोकर ऐसे शख़्स को पिलाया जाय जिसकी बीमारी ने डाक्टरों को हैरान व परेशान का रखा हो तो अल्लाह के फ़ज़्ल से जल्दी शिफा हासिल होगी।

अगर बे औलाद (निःसंतान) वाले को मुश्क व जाफ़रान से इसका ताबीज लिखकर बराबर 21 दिन तक पिलाया जाये तो अल्लाह के फ़ज़्ल से औलाद हेागी।

उम्मीद है कि कियामत के दिन इसकी बर्कत से बुलन्द दर्जा पायेगा कि और लोग भी इस दर्जा (मर्तबा) की इच्छा करेंगे । इस दुआ को पढने वाला कभी रास्ता न भूलेगा ।

Dua-e-Ganjul Arsh And It’s Attributes

Hazrat Jibrail (A.S) said, among other things, that one who recites this Dua would be bestowed upon by Allah three things: Fristly, He will give abundance (Barkat) in his subsistence. Secondly, Allah would provide him subsistence from the means unknown (Ghaib) and thirdly, his enemies would be defeated with contempt. If one recites this or keep it with himself, blessings of Allah would be continously showered on him and during the encounter with the enemy in the battle field he will come out victorous and if in travel, he would return home safe and sound. He will also remain protected from all sorts of Magic, wicked tactics and notourisity of the Devil as well as all sorts of worldly and heavenly troubles and agonies. If it is washed in the water of first raining and that water is given to the victim of the wicked tactics (Jadoo) to drink, the person would get rid of its wicked effects. If it is washed in water and such water is given for drinking to a person who is suffering from serious illness which cannot be cured by the doctors, that person would Insha Allah recover immediately. If its amulet (Taweez) is written in mush and saffron and given for drinking to a barren couple continously for 21 days, they would get offspring Insha Allah. It is hopped that through its auspiciousness one may get such a high station on the Day of judgement which others may long for. One who recites will not be perverted.

It is said that once a culprit who was deserving death punishment was arrested and brought before the ruler of Madina. The ruler ordered to kill him. The executioner tried three times to kill him through a sword but to no avail. Thereafter he was thrown into the water but did not sink to die. When all the efforts to kill him failed, the ruler asked him the reason for that. The culprit said that he has kept with him the amulet of Dua-e-Ganjul Arsh and therefore nothing could harm him. The ruler immediately gave him amnesty and granted him a rob of honour. The ruler took from him the amulet and made it a routine to recite it. In nutshell, the blessings contained in this Dua are countless and no one can describe them fully. If one transforms all the seven heavens into paper and transforms all the trees on the earth into pens and go on writing its attributes throughout the futurity, these attributes would not be completed. There is no room for any doubt in them. If one doubts he may invite misfortune for him, God forbid.

The regular reciting of this Dua as a routine would help in fulfillment of ones desire, abundance in the subsistence, protection and rid from the enemies, recovery from the sickness etc. There are many attributes of the Dua provided it is recited with purity of heart and soul.

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