अस्सी साल की इबादत का इनाम

assi saal ki ibadat ka inam

अस्सी साल की इबादत का इनाम

हज़रत अबू हुरैरा रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु की एक हदीस में ये नकल किया गया है: 

“जो शख्स जुमा के दिन अस्र की नमाज के बाद अपनी जगह से उठने से पहले अस्सी बार ये दुरुद शरीफ पढ़ता है:

उस के अस्सी सालों के गुनाहो को माफ़ कर दिया जाएगा, और अस्सी सालों की इबादत का सवाब उसके लिए लिखा जाएगा।”

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नमाज़ का तरीक़ा
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