Surah Waqia in Hindi

हिन्दी में सूरह वाकिया

सूरह वाकिया का नाम सूरह के पहले लफ्ज़ अल-वाकिआह से लिया गया है। इस सूरह में 96 आयतें हैं। ये सूरह हमारे कुरान पाक के 27 वे पारे मे मौजूद है । जो मक्का मुकररमा मे नाज़िल हुई लेकिन इसकी दो आयत (81-82) मदीना मुनव्वरह मे नाज़िल हुई।

“वक़िया” का अर्थ ही न्याय का दिन है । इसलिए, यह सूरा अंतिम दिन का शक्तिशाली तरीके से वर्णन करता है, जिसमें दर्शाया गया है कि मानव जाति को तीन समूहों में कैसे विभाजित किया जाएगा। इन तीनों समूहों की इस जीवन में किए गए कर्मों के आधार पर अलग-अलग शर्तें, दंड और पुरस्कार होंगे।
रोजाना इसकी तीलावत करने से आपको और हमे दुनियावी और दीनवी फायदे हासिल हो सकते है । 

दोस्तों इसके पढ़ने का असल मकसद रिज्क मे बरकत और दौलत हासिल करना है तो आप भी इस सूरत को पढ़कर फायदा उठा सकते है ।
सूरह वक़िया का वज़ीफ़ा पढ़ने पर हर किस्म की माली तरक्की हासिल की जा सकती है । क्यूंकि हमारे नबी ने खुद फरमाया है के जिस घर मे ये सूरत पढ़ी जाए उस घर मे कभी फाका नहीं आएगा। यानि उस घर मे अल्लाह की दौलत बरसने लगती है , और गरीबी खतम हो जाती है।

इबने मसूद रजि० ने हुज़ूर सल्ल ० का ये इर्शाद नकल किया है के जो शख्स हर रात को सूरह वाकिया पढे उसको कभी फ़ाक़ा नहीं होगा।
एक रिवायत मे आया है के जो शख्स सूरह वाकिया पढता है वो जननतुल फ़िरदौस के रहने वालों मे पुकारा जाता है।

एक रिवायत मे आया है के सूरह वाकिया सूरतुल गनी (Suratul gani) है , इसको पढ़ो और अपनी औलाद को सिखाओ । इस सूरत को सूरतुल गनी इस लिए भी कहा जाता है क्यूंकि ये सूरत पढ़ने वाले को अमीर कर देती है ।

नबी पाक सल्ल ० ने इरशाद फरमाया के सूरह वाकिया दौलत की सूरत है । इसकी तिलावत किया करो और अपने बच्चों को भी पढ़ाया करो – इबने असाका

हिन्दी में सूरह वाकिया

• इज़ा वक अतिल वाकिअह 1
• लैसा लिवक अतिहा काज़िबह 2
• खाफिज़तुर राफि अह 3
• इज़ा रुज्जतिल अरजु रज्जा 4
• व बुस्सतिल जिबालु बस्सा 5
• फकानत हबा अम मुम्बस्सा 6
• व कुन्तुम अजवाजन सलासह 7
• फ अस्हाबुल मय्मनति मा अस्हाबुल मय्मनह 8
• व अस्हाबुल मश अमति मा अस्हाबुल मश अमह 9
• वस साबिकूनस साबिकून 10
• उला इकल मुक़र्रबून 11
• फ़ी जन्नातिन नईम 12
• सुल्लतुम मिनल अव्वलीन 13
• व क़लीलुम मिनल आखिरीन 14
• अला सुरुरिम मौजूनह 15
• मुत्तकि ईना अलैहा मुतकाबिलीन 16
• यतूफु अलैहिम विल्दानुम मुखल्लदून 17
• बिअक्वाबिव व अबारीका व कअ’सिम मिम मईन 18
• ला युसद्द ऊना अन्हा वला युन्ज़िफून 19
• व फाकिहतिम मिम्मा यता खैयरून 20
• वलहमि तैरिम मिम्मा यश तहून 21
• व हूरून ईन 22
• कअम्सा लिल लुअ’लुइल मक्नून 23
• जज़ा अम बिमा कानू यअ’मलून 24
• ला यस्मऊना फ़ीहा लग्वव वला तअसीमा 25
• इल्ला कीलन सलामन सलामा 26
• व अस्हाबुल यामीनि मा अस्हाबुल यमीन 27
• फ़ी सिदरिम मख्जूद 28
• व तल्हिम मन्जूद 29
• व ज़िल्लिम मम्दूद 30
• वमा इम मस्कूब 31
• व फाकिहतिन कसीरह 32
• ला मक़्तू अतिव वला ममनूअह 33
• व फुरुशिम मरफूअह 34
• इन्ना अनशअ नाहुन्ना इंशाआ 35
• फज अल्नाहुन्ना अब्कारा 36
• उरुबन अतराबा 37
• लि अस्हाबिल यमीन 38
• सुल्लतुम मिनल अव्वलीन 39
• वसुल्लतुम मिनल आखिरीन 40
• व अस्हाबुश शिमालि मा अस्हाबुश शिमाल 41
• फ़ी समूमिव व हमीम 42
• व ज़िल्लिम मिय यहमूम 43
• ला बारिदिव वला करीम 44
• इन्नहुम कानू क़ब्ला ज़ालिका मुतरफीन 45
• व कानू युसिर्रूना अलल हिन्सिल अज़ीम 46
• व कानू यकूलूना अ इज़ा मितना व कुन्ना तुराबव व इज़ामन अ इन्ना लमब ऊसून 47
• अवा आबाउनल अव्वलून 48
• कुल इन्नल अव्वलीना वल आखिरीन 49
• लमज मूऊना इला मीकाति यौमिम मालूम 50
• सुम्मा इन्नकुम अय्युहज़ ज़ाल्लूनल मुकज्ज़िबून 51
• ल आकिलूना मिन शजरिम मिन ज़क्कूम 52
• फ मालिऊना मिन्हल बुतून 53
• फ शारिबूना अलैहि मिनल हमीम 54
• फ शारिबूना शुरबल हीम 55
• हाज़ा नुज़ुलुहुम यौमद दीन 56
• नहनु खलक्नाकुम फलौला तुसद्दिकून 57
• अफा रअय्तुम मा तुम्नून 58
• अ अन्तुम तख्लुकूनहु अम नहनुल खालिकून 59
• नहनु क़द्दरना बय्नकुमुल मौता वमा नहनु बिमस्बूकीन 60
• अला अन नुबददिला अम्सालकुम व नुन्शिअकुम फ़ी माला तअ’लमून 61
• व लक़द अलिम्तुमुन नश अतल ऊला फलौला तज़क करून 62
• अफा रअय्तुम मा तहरुसून 63
• अ अन्तुम तजर उनहू अम नहनुज़ जारिऊन 64
• लौ नशाऊ लजा अल्नाहु हुतामन फज़ल तुम तफक्कहून 65
• इन्ना ल मुगरमून 66
• बल नहनु महरूमून 67
• अफा रअय्तुमुल माअल्लज़ी तशरबून 68
• अ अन्तुम अन्ज़ल्तुमूहु मिनल मुज्नि अम नहनुल मुन्ज़िलून 69
• वलौ नशाऊ ज अल्नाहू उजाजन फलौला तश्कुरून 70
• अफा रअय्तुमुन नारल लती तूरून 71
• अ अन्तुम अनश’अतुम शजरतहा अम नहनुल मुन्शिऊन 72
• नहनु जअल्नाहा तज्किरतव व मताअल लिल मुक्वीन 73
• फ़सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम 74
• फला उक्सिमु बि मवाक़िइन नुजूम 75
• व इन्नहू ल क़समुल लौ तअ’लमूना अज़ीम 76
• इन्नहू लकुर आनून करीम 77
• फ़ी किताबिम मक्नून 78
• ला यमस्सुहू इल्लल मुतह हरून 79
• तन्जीलुम मिर रब्बिल आलमीन 80
• अफा बिहाज़ल हदीसि अन्तुम मुद हिनून 81
• व तज अलूना रिज्क़कुम अन्नकुम तुकज्ज़िबून 82
• फलौला इज़ा बला गतिल हुल्कूम 83
• व अन्तुम ही नइजिन तन्ज़ुरून 84
• व नहनु अकरबु इलैहि मिन्कुम वला किलला तुब्सिरून 85
• फ़लौला इन कुन्तुम गैरा मदीनीन 86
• तर जिऊनहा इन कुन्तुम सदिकीन 87
• फअम्मा इन कान मिनल मुक़र्रबीन 88
• फ़ रौहुव व रैहानुव व जन्नतु नईम 89
• व अम्मा इन कान मिन अस्हाबिल यमीन 90
• फ़ सलामुल लका मिन अस्हाबिल यमीन 91
• व अम्मा इन कान मिनल मुकज्ज़िबीनज़ जाल लीन 92
• फ नुज़ुलुम मिन हमीम 93
• व तस्लियतु जहीम 94
• इन्ना हाज़ा लहुवा हक्कुल यक़ीन 95
• फ़ सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम 96

हिंदी अनुवाद के साथ सूरह वाकिया

बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।
1. इज़ा वक अतिल वाकिअह
उस वक़्त को याद करो जब क़यामत वाक़े हो जाएगी
2. लैसा लिवक अतिहा काज़िबह
जिस के वाक़े होने में कोई झूट नहीं
3. खाफिज़तुर राफि अह
किसी को नीचा करेगी और किसी को ऊंचा
4. इज़ा रुज्जतिल अरजु रज्जा
जब ज़मीन हिला कर रख दी जाएगी
5. व बुस्सतिल जिबालु बस्सा
और पहाड़ पीस कर रख दिए जायेंगे
6. फकानत हबा अम मुम्बस्सा
तो वो उड़ता हुआ गुबार बन जायेंगे
7. व कुन्तुम अजवाजन सलासह
और तुम तीन किस्मों में बंट जाओगे
8. फ अस्हाबुल मय्मनति मा अस्हाबुल मय्मनह
( एक ) तो दाहिनी तरफ़ वाले, क्या कहने दाहिनी तरफ़ वालों के
9. व अस्हाबुल मश अमति मा अस्हाबुल मश अमह
( दुसरे ) बायीं तरफ़ वाले, बायीं तरफ़ वाले कैसे बुरे हाल में होंगे
10. वस साबिकूनस साबिकून
( तीसरे ) आगे बढ़ जाने वाले, ( उन का क्या कहना ) वो तो आगे बढ़ जाने वाले हैं
11. उला इकल मुक़र्रबून
यही हैं जिनको अल्लाह से ख़ुसूसी नज़दीकी हासिल होगी
12. फ़ी जन्नातिन नईम
वो नेअमतों वाले बाग़ों में होंगे
13. सुल्लतुम मिनल अव्वलीन
उन का एक बड़ा गिरोह तो अगले लोगों में होगा
14. व क़लीलुम मिनल आखिरीन
और थोड़े से पिछले लोगों में होंगे
15. अला सुरुरिम मौजूनह
ऐसी मसेहरियों पर जो सोने से बुनी और जवाहरात से जड़ी होंगी
16. मुत्तकि ईना अलैहा मुतकाबिलीन
उन पर आमने सामने टेक लगाये हुए बैठे होंगे
17. यतूफु अलैहिम विल्दानुम मुखल्लदून
उन की ख़िदमत में ऐसे लड़के जो हमेशा लड़के ही रहेंगे वो उनके पास आते जाते रहेंगे
18. बिअक्वाबिव व अबारीका व कअ’सिम मिम मईन
ग्लासों और जगों में साफ़ सुथरी शराब के जाम लिए हुए
19. ला युसद्द ऊना अन्हा वला युन्ज़िफून
ऐसी शराब जिससे न उनके सर चकरायेंगे और न उनके होश उड़ेंगे
20. व फाकिहतिम मिम्मा यता खैयरून
और ऐसे मेवे लिए हुए जिनको वो खुद पसंद करेंगे
21. वलहमि तैरिम मिम्मा यश तहून
और ऐसे परिंदों का गोश्त लिए जिनकी उन्हें ख्वाहिश होगी
22. व हूरून ईन
और खूबसूरत आँखों वाली हूरें
23. कअम्सा लिल लुअ’लुइल मक्नून
जैसे छिपा छिपा कर रखे गए मोती
24. जज़ा अम बिमा कानू यअ’मलून
ये सब उनके कामों के बदले के तौर पर होगा जो वो किया करते थे
25. ला यस्मऊना फ़ीहा लग्वव वला तअसीमा
वो न उस में बेकार बातें सुनेंगे और न ही कोई गुनाह की बात
26. इल्ला कीलन सलामन सलामा
सिवाए सलामती ही सलामती की बात के
27. व अस्हाबुल यामीनि मा अस्हाबुल यमीन
और जो दायें तरफ वाले हैं, क्या खूब हैं दायें तरफ वाले
28. फ़ी सिदरिम मख्जूद
काँटों से पाक सिदरा के दरख्तों में
29. व तल्हिम मन्जूद
लदे हुए केले के पेड़ों में
30. व ज़िल्लिम मम्दूद
और फैले हुए साये में
31. वमा इम मस्कूब
और बहते हुए पानी में
32. व फाकिहतिन कसीरह
और बहुत से फलों में
33. ला मक़्तू अतिव वला ममनूअह
जो न ख़त्म होने को आयेंगे और न उन में कोई रोक टोक होगी
34. व फुरुशिम मरफूअह
और बलंद बिस्तरों में
35. इन्ना अनशअ नाहुन्ना इंशाआ
हम ने (उन के लिए) हूरें बनाई हैं
36. फज अल्नाहुन्ना अब्कारा
तो हम ने उनको कुंवारी बनाया है
37. उरुबन अतराबा
मुहब्बत भरी हमजोलियाँ
38. लि अस्हाबिल यमीन
ये है दायें तरफ वालों के लिए
39. सुल्लतुम मिनल अव्वलीन
उनकी एक बड़ी जमात अगले लोगों में है
40. वसुल्लतुम मिनल आखिरीन
उनकी एक बड़ी जमात पिछले लोगों में है
41. व अस्हाबुश शिमालि मा अस्हाबुश शिमाल
और बाएं तरफ वाले, क्या हाल होगा बाएं तरफ वालों का
42. फ़ी समूमिव व हमीम
वो होंगे झुलसा देने वाली हवा में और खौलते पानी में
43. व ज़िल्लिम मिय यहमूम
सियाह धुएं के साए में
44. ला बारिदिव वला करीम
जो न ठंडा होगा और न फायदा पहुँचाने वाला होगा
45. इन्नहुम कानू क़ब्ला ज़ालिका मुतरफीन
इस से पहले वो बड़े ऐशो इशरत में पड़े हुए थे
46. व कानू युसिर्रूना अलल हिन्सिल अज़ीम
और बड़े भारी गुनाह ( शिर्क ) पर अड़े रहते थे
47. व कानू यकूलूना अ इज़ा मितना व कुन्ना तुराबव व इज़ामन अ इन्ना लमब ऊसून
और कहा करते थे : जब हम मर जायेंगे और मिटटी हड्डी हो जायेंगे तो क्या हम फिर दोबारा जिंदा किये जायेंगे
48. अवा आबाउनल अव्वलून
और क्या हमारे पहले बाप दादा भी
49. कुल इन्नल अव्वलीना वल आखिरीन
कह दीजिये कि सब अगले और पिछले लोग
50. लमज मूऊना इला मीकाति यौमिम मालूम
एक मुक़र्ररह दिन पर ज़रूर इकठ्ठा किये जायेंगे
51. सुम्मा इन्नकुम अय्युहज़ ज़ाल्लूनल मुकज्ज़िबून
फिर ए गुमराहों और ए झुटलाने वालों ! यक़ीनन तुम
52. ल आकिलूना मिन शजरिम मिन ज़क्कूम
यक़ीनन ज़क्कूम के दरख़्त खाओगे
53. फ मालिऊना मिन्हल बुतून
और इसी से पेट भरोगे
54. फ शारिबूना अलैहि मिनल हमीम
फिर उस पर खौलता हुआ पानी पियोगे
55. फ शारिबूना शुरबल हीम
और पियोगे भी प्यासे ऊंटों की तरह
56. हाज़ा नुज़ुलुहुम यौमद दीन
क़यामत के दिन यही उन की मेहमान नवाज़ी होगी
57. नहनु खलक्नाकुम फलौला तुसद्दिकून
हम ने ही तुम को पैदा किया तो फिर तुम (दोबारा जिंदा किये जाने को) सच क्यूँ नहीं मानते हो ?
58. अफा रअय्तुम मा तुम्नून
भला देखो तो सही, जो मनी तुम (औरतों के रहम में) डालते हो
59. अ अन्तुम तख्लुकूनहु अम नहनुल खालिकून
उस को तुम इंसान बनाते हो या हम बनाने वाले हैं
60. नहनु क़द्दरना बय्नकुमुल मौता वमा नहनु बिमस्बूकीन
हम ने ही तुम्हारे लिए मरना तय किया है (कि हर शख्स पर मौत आती है) और हम उस बात से आजिज़ नहीं हैं
61. अला अन नुबददिला अम्सालकुम व नुन्शिअकुम फ़ी माला तअ’लमून
कि तुम्हारी जगह तुम्हारे जैसे किसी और को ले आयेंगे और तुम को वहां उठा खड़ा करेंगे, जिस का तुम को कोई भी इल्म नहीं
62. व लक़द अलिम्तुमुन नश अतल ऊला फलौला तज़क करून
और तुम तो पहली पैदाइश को जानते ही हो तो क्यूँ सबक़ नहीं लेते
63. अफा रअय्तुम मा तहरुसून
देखो तो सही कि तुम जो कुछ बोते हो
64. अ अन्तुम तजर उनहू अम नहनुज़ जारिऊन
उसको तुम उगाते हो या हम उगाते हो
65. लौ नशाऊ लजा अल्नाहु हुतामन फज़ल तुम तफक्कहून
अगर हम चाहें तो उसको रेज़ा रेज़ा कर डालें फिर तुम बातें बनाते रह जाओ
66. इन्ना ल मुगरमून
( तुम कहने लगो : ) कि हम पर तो तावान पड़ गया
67. बल नहनु महरूमून
बल्कि हम बड़े बदनसीब हैं
68. अफा रअय्तुमुल माअल्लज़ी तशरबून
फिर बताओ तो सही कि जिस पानी को तुम पीते हो
69. अ अन्तुम अन्ज़ल्तुमूहु मिनल मुज्नि अम नहनुल मुन्ज़िलून
उसको बादल से तुंम बरसाते हो या हम बरसाते हैं
70. वलौ नशाऊ ज अल्नाहू उजाजन फलौला तश्कुरून
अगर हम चाहें तो उसको खारा कर दें फिर तुम शुक्र क्यूँ नहीं करते
71. अफा रअय्तुमुन नारल लती तूरून
फिर देखो तो सही जो आग तुम सुलगाते हो
72. अ अन्तुम अनश’अतुम शजरतहा अम नहनुल मुन्शिऊन
उसके दरख़्त को तुम ने पैदा किया है या हम ने ?
73. नहनु जअल्नाहा तज्किरतव व मताअल लिल मुक्वीन
हम ने उसको याद दिहानी करने वाला और मुसाफिरों के लिए नफाबख्श बनाया है
74. फ़सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम
तो आप अपने अज़मत वाले परवरदिगार के नाम की पाकी बयान कीजिये
75. फला उक्सिमु बि मवाक़िइन नुजूम
तो अब मैं उन जगहों की क़सम खाकर कहता हूँ जहाँ सितारे गिरते हैं
76. व इन्नहू ल क़समुल लौ तअ’लमूना अज़ीम
और यक़ीनन अगर तुम जानो तो ये बहुत बड़ी क़सम है
77. इन्नहू लकुर आनून करीम
बेशक ये बड़ा ही काबिले एहतराम क़ुरान है
78. फ़ी किताबिम मक्नून
जो एक महफ़ूज़ किताब में पहले से मौजूद है
79. ला यमस्सुहू इल्लल मुतह हरून
इस को सिर्फ़ वही हाथ लगा सकता है जो खूब पाक साफ़ हो
80. तन्जीलुम मिर रब्बिल आलमीन
ये तमाम आलम के परवरदिगार की तरफ़ से उतारा हुआ है
81. अफा बिहाज़ल हदीसि अन्तुम मुद हिनून
क्या तुम इस कलाम के परवरदिगार का इनकार करते हो ?
82. व तज अलूना रिज्क़कुम अन्नकुम तुकज्ज़िबून
और इस के झुटलाने को ही अपना मशगला बना रखा है
83. फलौला इज़ा बला गतिल हुल्कूम
तो जब जान गले तक आ पहुँचती है
84. व अन्तुम ही नइजिन तन्ज़ुरून
और तुम उस वक़्त ( मरने वाले को ) देख रहे होते हो
85. व नहनु अकरबु इलैहि मिन्कुम वला किलला तुब्सिरून
और हम तुम से ज़्यादा उस से क़रीब हैं हालाँकि तुम नहीं देखते
86 फ़लौला इन कुन्तुम गैरा मदीनीन
अगर तुम किसी और के क़ाबू में नहीं हो तो
87. तर जिऊनहा इन कुन्तुम सदिकीन
तो उस जान को वापस नहीं क्यूँ नहीं ले आते अगर तुम सच्चे हो ?
88. फअम्मा इन कान मिनल मुक़र्रबीन
तो अगर मरने वाला खुदा के मुक़र्रिब बन्दों में से है
89. फ़ रौहुव व रैहानुव व जन्नतु नईम
तो (उस के लिए) आराम ही आराम, ख़ुशबू ही ख़ुशबू और नेअमत भरी जन्नत है
90. व अम्मा इन कान मिन अस्हाबिल यमीन
और अगर वो दाहिनी तरफ़ वालों में से है
91. फ़ सलामुल लका मिन अस्हाबिल यमीन
तो ( उस से कहा जायेगा तेरे लिए सलामती है कि तू दायें तरफ़ वालों में से है
92. व अम्मा इन कान मिनल मुकज्ज़िबीनज़ जाल लीन
और अगर वो झुटलाने वाले गुमराह लोगों में से था
93. फ नुज़ुलुम मिन हमीम
तो खौलते हुए पानी से मेज़बानी होगी
94. व तस्लियतु जहीम
और (उसे) दोज़ख़ में दाख़िल होना होगा
95. इन्ना हाज़ा लहुवा हक्कुल यक़ीन
बेशक ये यक़ीनी बात है
96. फ़ सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम
बस आप अपने रब के नाम की तस्बीह किये जाइए जो बड़ी अजमतों वाला है

Surah Yaseen in English

Bismillaahir Rahmaanir Raheem
1. Izaa waqa’atil waaqi’ah
2. Laisa liwaq’atihaa kaazibah
3. Khafidatur raafi’ah
4. Izaa rujjatil ardu rajjaa
5. Wa bussatil jibaalu bassaa
6. Fakaanat habaaa’am mumbassaa
7. Wa kuntum azwaajan salaasah
8. Fa as haabul maimanati maaa as haabul maimanah
9. Wa as haabul mash’amati maaa as haabul mash’amah
10. Wassaabiqoonas saabiqoon
11. Ulaaa’ikal muqarraboon
12. Fee Jannaatin Na’eem
13. Sullatum minal awwaleen
14. Wa qaleelum minal aa khireen
15. ‘Alaa sururim mawdoonah
16. Muttaki’eena ‘alaihaa mutaqabileen
17. Yatoofu ‘alaihim wildaa num mukhalladoon
18. Bi akwaabinw wa abaareeq, wa kaasim mim ma’een
19. Laa yusadda’oona ‘anhaa wa laa yunzifoon
20. Wa faakihatim mimmaa yatakhaiyaroon
21. Wa lahmi tairim mimmaa yashtahoon
22. Wa hoorun’een
23. Ka amsaalil lu’lu’il maknoon
24. Jazaaa’am bimaa kaanoo ya’maloon
25. Laa yasma’oona feehaa laghwanw wa laa taaseemaa
26. Illaa qeelan salaaman salaamaa
27. Wa as haabul yameeni maaa as haabul Yameen
28. Fee sidrim makhdood
29. Wa talhim mandood
30. Wa zillim mamdood
31. Wa maaa’im maskoob
32. Wa faakihatin kaseerah
33. Laa maqtoo’atinw wa laa mamnoo’ah
34. Wa furushim marfoo’ah
35. Innaaa anshaanaahunna inshaaa’aa
36. Faja’alnaahunna abkaaraa
37. ‘Uruban atraabaa
38. Li as haabil yameen
39. Sullatum minal awwa leen
40. Wa sullatum minal aakhireen
41. Wa as haabush shimaali maaa as haabush shimaal
42. Fee samoominw wa hameem
43. Wa zillim miny yahmoom
44. Laa baaridinw wa laa kareem
45. Innahum kaanoo qabla zaalika mutrafeen
46. Wa kaanoo yusirroona ‘alal hinsil ‘azeem
47. Wa kaanoo yaqooloona a’izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa izaaman’ainnaa lamab’oosoon
48. Awa aabaaa’unal awwaloon
49. Qul innal awwaleena wal aakhireen
50. Lamajmoo’oona ilaa meeqaati yawmim ma’loom
51. summa innakum ayyuhad daaalloonal mukazziboon
52. La aakiloona min shaja rim min zaqqoom
53. Famaali’oona minhal butoon
54. Fashaariboona ‘alaihi minal hameem
55. Fashaariboona shurbal heem
56. Haazaa nuzuluhum yawmad deen
57. Nahnu khalaqnaakum falaw laa tusaddiqoon
58. Afara’aytum maa tumnoon
59. ‘A-antum takhluqoo nahooo am nahnul khaaliqoon
60. Nahnu qaddarnaa baina kumul mawta wa maa nahnu bimasbooqeen
61. ‘Alaaa an nubaddila amsaalakum wa nunshi’akum fee maa laa ta’lamoon
62. Wa laqad ‘alimtumun nash atal oolaa falaw laa tazakkaroon
63. Afara’aytum maa tahrusoon
64. ‘A-antum tazra’oonahooo am nahnuz zaari’ooon
65. Law nashaaa’u laja’al naahu hutaaman fazaltum tafakkahoon
66. Innaa lamughramoon
67. Bal nahnu mahroomoon
68. Afara’aytumul maaa’allazee tashraboon
69. ‘A-antum anzaltumoohu minal muzni am nahnul munziloon
70. Law nashaaa’u ja’alnaahu ujaajan falaw laa tashkuroon
71. Afara’aytumun naaral latee tooroon
72. ‘A-antum anshaatum shajaratahaaa am nahnul munshi’oon
73. Nahnu ja’alnaahaa tazkira tanw wa mataa’al lilmuqween
74. Fasabbih bismi Rabbikal ‘azeem
75. Falaa uqsimu bimaawaa qi’innujoom
76. Wa innahoo laqasamul lawta’lamoona’azeem
77. Innahoo la quraanun kareem
78. Fee kitaabim maknoon
79. Laa yamassuhooo illal mutahharoon
80. Tanzeelum mir Rabbil’aalameen
81. Afabihaazal hadeesi antum mudhinoon
82. Wa taj’aloona rizqakum annakum tukazziboon
83. Falaw laaa izaa balaghatil hulqoom
84. Wa antum heena’izin tanzuroon
85. Wa nahnu aqrabu ilaihi minkum wa laakil laa tubsiroon
86. Falaw laaa in kuntum ghaira madeeneen
87. Tarji’oonahaaa in kuntum saadiqeen
88. Fa ammaaa in kaana minal muqarrabeen
89. Farawhunw wa raihaa nunw wa jannatu na’eem
90. Wa ammaaa in kaana min as haabil yameen
91. Fasalaamul laka min as haabil yameen
92. Wa ammaaa in kaana minal mukazzibeenad daaalleen
93. Fanuzulum min hameem
94. Wa tasliyatu jaheem
95. Inna haaza lahuwa haqqul yaqeen
96. Fasabbih bismi rabbikal ‘azeem

Surah Yaseen English Translation

In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

1. When the Event inevitable cometh to pass,
2. Then will no (soul) entertain falsehood concerning its coming.
3. (Many) will it bring low; (many) will it exalt;
4. When the earth shall be shaken to its depths,
5. And the mountains shall be crumbled to atoms,
6. Becoming dust scattered abroad,
7. And ye shall be sorted out into three classes.
8. Then (there will be) the Companions of the Right Hand;- What will be the Companions of the Right Hand?
9. And the Companions of the Left Hand,- what will be the Companions of the Left Hand?
10. And those Foremost (in Faith) will be Foremost (in the Hereafter).
11. These will be those Nearest to Allah:
12. In Gardens of Bliss:
13. A number of people from those of old,
14. And a few from those of later times.
15. (They will be) on Thrones encrusted (with gold and precious stones),
16. Reclining on them, facing each other.
17. Round about them will (serve) youths of perpetual (freshness),
18. With goblets, (shining) beakers, and cups (filled) out of clear-flowing fountains:
19. No after-ache will they receive therefrom, nor will they suffer intoxication:
20. And with fruits, any that they may select:
21. And the flesh of fowls, any that they may desire.
22. And (there will be) Companions with beautiful, big, and lustrous eyes,-
23. Like unto Pearls well-guarded.
24. A Reward for the deeds of their past (life).
25. Not frivolity will they hear therein, nor any taint of ill,-
26. Only the saying, “Peace! Peace”.
27. The Companions of the Right Hand,- what will be the Companions of the Right Hand?
28. (They will be) among Lote-trees without thorns,
29. Among Talh trees with flowers (or fruits) piled one above another,-
30. In shade long-extended,
31. By water flowing constantly,
32. And fruit in abundance.
33. Whose season is not limited, nor (supply) forbidden,
34. And on Thrones (of Dignity), raised high.
35. We have created (their Companions) of special creation.
36. And made them virgin – pure (and undefiled), –
37. Beloved (by nature), equal in age,-
38. For the Companions of the Right Hand.
39. A (goodly) number from those of old,
40. And a (goodly) number from those of later times.
41. The Companions of the Left Hand,- what will be the Companions of the Left Hand?
42. (They will be) in the midst of a Fierce Blast of Fire and in Boiling Water,
43. And in the shades of Black Smoke:
44. Nothing (will there be) to refresh, nor to please:
45. For that they were wont to be indulged, before that, in wealth (and luxury),
46. And persisted obstinately in wickedness supreme!
47. And they used to say, “What! when we die and become dust and bones, shall we then indeed be raised up again?-
48. “(We) and our fathers of old?”
49. Say: “Yea, those of old and those of later times,
50. “All will certainly be gathered together for the meeting appointed for a Day well-known.
51. “Then will ye truly,- O ye that go wrong, and treat (Truth) as Falsehood!-
52. “Ye will surely taste of the Tree of Zaqqum.
53. “Then will ye fill your insides therewith,
54. “And drink Boiling Water on top of it:
55. “Indeed ye shall drink like diseased camels raging with thirst!”
56. Such will be their entertainment on the Day of Requital!
57. It is We Who have created you: why will ye not witness the Truth?
58. Do ye then see?- The (human Seed) that ye throw out,-
59. Is it ye who create it, or are We the Creators?
60. We have decreed Death to be your common lot, and We are not to be frustrated
61. from changing your Forms and creating you (again) in (forms) that ye know not.
62. And ye certainly know already the first form of creation: why then do ye not celebrate His praises?
63. See ye the seed that ye sow in the ground?
64. Is it ye that cause it to grow, or are We the Cause?
65. Were it Our Will, We could crumble it to dry powder, and ye would be left in wonderment,
66. (Saying), “We are indeed left with debts (for nothing):
67. “Indeed are we shut out (of the fruits of our labour)”
68. See ye the water which ye drink?
69. Do ye bring it down (in rain) from the cloud or do We?
70. Were it Our Will, We could make it salt (and unpalatable): then why do ye not give thanks?
71. See ye the Fire which ye kindle?
72. Is it ye who grow the tree which feeds the fire, or do We grow it?
73. We have made it a memorial (of Our handiwork), and an article of comfort and convenience for the denizens of deserts.
74. Then celebrate with praises the name of thy Lord, the Supreme!
75. Furthermore I call to witness the setting of the Stars,-
76. And that is indeed a mighty adjuration if ye but knew,-
77. That this is indeed a qur’an Most Honourable,
78. In Book well-guarded,
79. Which none shall touch but those who are clean:
80. A Revelation from the Lord of the Worlds.
81. Is it such a Message that ye would hold in light esteem?
82. And have ye made it your livelihood that ye should declare it false?
83. Then why do ye not (intervene) when (the soul of the dying man) reaches the throat,-
84. And ye the while (sit) looking on,-
85. But We are nearer to him than ye, and yet see not,-
86. Then why do ye not,- If you are exempt from (future) account,-
87. Call back the soul, if ye are true (in the claim of independence)?
88. Thus, then, if he be of those Nearest to Allah,
89. (There is for him) Rest and Satisfaction, and a Garden of Delights.
90. And if he be of the Companions of the Right Hand,
91. (For him is the salutation), “Peace be unto thee”, from the Companions of the Right Hand.
92. And if he be of those who treat (Truth) as Falsehood, who go wrong,
93. For him is Entertainment with Boiling Water.
94. And burning in Hell-Fire.
95. Verily, this is the Very Truth and Certainly.
96. So celebrate with praises the name of thy Lord, the Supreme.

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