दरूद शरीफ़

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दरूद शरीफ़

अल्ला हुम-मा सल्लि अला मुहम्म-दिव व अला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लै त अला इब्राही-म व अला आलि इब्राही म इन-न क हमीदुम मजीद० अल्ला हुम-म बारिक अला मुहम्म-दिव व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारक-त अला इब्राही-म व अला आलि इब्राही-म इन-नका हमीदुम मजीद.

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! रहमत नाज़िल फ़रमा मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर और आलपर हज़रत मुहम्मद की, जैसे रहमत नाज़िल फ़रमाई तूने इब्राहीम पर और आल पर इब्राहीम की। बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बड़ी बुजुर्गी वाला हैं। ऐ अल्लाह! बरकत नाज़िल फ़रमा मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर और आलपर मुहम्मद की जैसी बरकत नाज़िल फ़रमाई तूने इब्राहीम पर और आल पर इब्राहीम की। बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बड़ी बुजुर्गी वाला हैं।

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नमाज़ का तरीक़ा
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