नमाज में पढ़ी जाने वाली 12 सूरते

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7. सूरह नस्र

तर्जुमा: शुरू अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है। 

  1. ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहुचेंगी

  2. और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाखिल हो रहे हैं

  3. तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है

8. सूरह अल क़द्र

तर्जुमा: शुरू अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है।

  1. हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाजिल (करना शुरू) किया।

  2. और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है।

  3. शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है।

  4. इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाजिल होते हैं।

  5. ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है।

9. सूरह लहब (तब्बत यदा)

तर्जुमा: शुरू अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है। 

  1. अबू लहब के दोनों हाथ टूट जाएँ और वो हलाक हो जाये 

  2. न तो उसका माल उसके काम आया न तो उसकी कमाई 

  3. अब वो भड़कती आग में दाखिल होगा 

  4. और उसकी बीवी भी, जो सर पर लकड़ियाँ लाद कर लाती है 

  5. उसके गले में एक खूब बटी हुई रस्सी होगी

10. सूरह अस्र (वल अम्रि)

तर्जुमा: शुरू अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है।

  1. नमाज़े अस्र की क़सम 

  2. कि इंसान बड़े घाटे में है 

  3. सिवाए उन लोगों के जो ईमान लाये नेक अमल करते रहें, एक दुसरे को हक़ (पर क़ायम रहने) की और सब्र करने की ताकीद करते रहें

11. सूरह फ़ील (अलम तरा कैफ़)