Surah Al-Bayyinah in Hindi

हिन्दी में सूरह अल-बय्यिना

सूरह अल-बय्यिना में कुल 8 आयतें हैं। सूरह अल-बय्यिना का मतलब स्पष्ट सबूत है। सूरह बय्यिना कुरान पाक के 30 वे पारे में मौजूद है।

सूरह अल-बय्यिना हिन्दी में

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

  1.  लम यकुनिल लज़ीना कफरू मिन अहलिल किताबि वल मुशरिकीना मुन्फक कीना हत्ता तअ’ति यहुमुल बय्यिनह
  2. रसूलुम मिनल लाहि यत्लू सुहुफ़म मुतह हरह
  3. फ़ीहा कुतुबुन क़य्यिमह
  4. वमा तफर रक़ल लज़ीना ऊतुल किताबा इल्ला मिम ब’अदि मा जा अत्हुमुल बय्यिनह
  5. वमा उमिरू इल्ला लियअ’बुदुल लाहा मुखलिसीना लहुद दीन हुनाफ़ा अ वयुक़ीमुस सलाता व युअ’तुज़ ज़काता व ज़ालिका दीनुल क़य्यिमह
  6. इन्नल लज़ीना कफरू मिन अहलिल किताबि वल मुशरिकीना फ़ी नारि जहन्नमा खालिदीना फ़ीहा उलाइका हुम शररुल बरिय्यह
  7. इन्नल लज़ीना आमनू अमिलुस सालिहाति उलाइका हुम खैरुल बरिय्यह
  8. जज़ाउहुम इन्दा रब्बिहिम जन्नातु अदनिन तजरी मिन तहतिहल अन्हारु खालिदीना फ़ीहा अबदा रज़ियल लाहू अन्हुम वरजू अन्ह ज़ालिका लिमन खशिया रब्बह

सूरह अल-बय्यिना हिंदी अनुवाद के साथ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

  1. अहले किताब के काफ़िर और मुश्रिक लोग ईमान लाने वाले नहीं थे जब तक कि उनके पास खुला प्रमाण न आ जाये।
  2. अर्थात अल्लाह का एक रसूल, जो पवित्र ग्रन्थ पढ़कर सुनाये।
  3. जिसमें उचित आदेश है।
  4. और जिन लोगों को ग्रन्थ दिये गये, उन्होंने इस खुले प्रमाण के आ जाने के पश्चात ही मतभेद किया।
  5. और उन्हें केवल यही आदेश दिया गया था कि वे धर्म को शुध्द रखें और सबको तज कर केवल अल्लाह की उपासना करें, नमाज़ अदा करें और ज़कात दें और यही शाश्त धर्म है।
  6. निःसंदेह, जो लोग अह्ले किताब में से काफ़िर हो गये तथा मुश्रिक (मिश्रणवादी), तो वे सदा नरक की आग में रहेंगे और वही दुष्टतम जन हैं।
  7. जो लोग ईमान लाये तथा सदाचार करते रहे, तो वही सर्वश्रेष्ठ जन हैं।
  8. उनका प्रतिफल उनके पालनहार की ओर से सदा रहने वाले बाग़ हैं। जिनके नीचे नहरें बहती होंगी। वे उनमें सदा निवास करेंगे। अल्लाह उनसे प्रसन्न हुआ और वे अल्लाह से प्रसन्न हुए। ये उसके लिए है, जो अपने पालनहार से डरा।

Surah Al-Bayyinah in English

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

  1. Lam ya kunil lazeena kafaru min ahlil kitaabi wal mushri keena mun fak keena hattaa ta-tiya humul bayyinah
  2. Rasoolum minal laahi yatlu suhufam mutahharah
  3. Feeha kutubun qaiyimah
  4. Wa maa tafarraqal lazeena ootul kitaaba il-la mim b’adi ma jaa-at humul baiyyinah
  5. Wa maa umiroo il-la liy’abu dul laaha mukhliseena lahud-deena huna faa-a wa yuqeemus salaata wa yu-tuz zakaata; wa zaalika deenul qaiyimah
  6. Innal lazeena kafaru min ahlil kitaabi wal mushri keena fee nari jahan nama khaali deena feeha; ulaa-ika hum shar rul ba reeyah
  7. Innal lazeena aamanu wa ‘amilus saalihaati ula-ika hum khairul bareey yah
  8. Jazaa-uhum inda rabbihim jan naatu ‘adnin tajree min tahtihal an haaru khalideena feeha abada; radiy-yallaahu ‘anhum wa ra du ‘an zaalika liman khashiya rabbah.

Surah Al-Bayyinah English Translation

In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

  1. Those who reject (Truth), among the People of the Book and among the Polytheists, were not going to depart (from their ways) until there should come to them Clear Evidence,-
  2. An messenger from Allah, rehearsing scriptures kept pure and holy:
  3. Wherein are laws (or decrees) right and straight.
  4. Nor did the People of the Book make schisms, until after there came to them Clear Evidence.
  5. And they have been commanded no more than this: To worship Allah, offering Him sincere devotion, being true (in faith); to establish regular prayer; and to practise regular charity; and that is the Religion Right and Straight.
  6. Those who reject (Truth), among the People of the Book and among the Polytheists, will be in Hell-Fire, to dwell therein (for aye). They are the worst of creatures.
  7. Those who have faith and do righteous deeds,- they are the best of creatures.
  8. Their reward is with Allah: Gardens of Eternity, beneath which rivers flow; they will dwell therein for ever; Allah well pleased with them, and they with Him: all this for such as fear their Lord and Cherisher.
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