सूरह बकरा हिंदी में (पेज 3)​

सूरह बकरा हिंदी में (पेज 3) Surah Al-Baqarah in Hindi

  • (41). व आमिनू बिमा अन्ज़ल्तु मुसद्दिकल्लिमा म-अकुम् व ला तकूनू अव्व-ल काफ़िरिम् बिहि व ला तश्तरू बिआयाती स्-म-नन् कलीलंव व इय्या-य फत्तकून 
    और जो ( कुरान ) मैंने उतारा है वह उस किताब (तौरेत) की (भी) तसदीक़ करता हूँ जो तुम्हारे पास है और सबसे पहले तुम ही उसके इनकार करनेवाले न बनो। और मेरी आयतों के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी फायदा) न लो और मुझ ही से डरते रहो।
  • (42). वला तल्बिसुल-हक्-क बिल्बातिलि व तक्तुमुल्हक्-क व अन्तुम् तअ्लमून 
    और सत्य में असत्य का घाल-मेल न करो और हक़ बात को न छिपाओ हालाँकि तुम जानते हो और पाबन्दी से नमाज़ अदा करो।
  • (43). व अकीमुस्सला-त व आतुज़्ज़ाका-त वर्-कअू म-अर्राकिअीन 
    और ज़कात दिया करो और जो लोग (हमारे सामने) इबादत के लिए झुकते हैं उनके साथ तुम भी झुका करो।
  • (44). अ-तअ्मुरूनन्ना-स बिल्बिर्रि।
    वतन्सौ-न अन्फुसकुम् व अन्तुम् तत्लूनल-किता-ब, अ-फला तअ्किलून 

    और तुम लोगों से नेकी करने को कहते हो और अपनी ख़बर नहीं लेते हालाँकि तुम किताबे खुदा को बराबर रटा करते हो तो तुम क्या इतना भी नहीं समझते।
  • (45). वस्तअीनू बिस्सबरि वस्सलाति, व इन्नहा ल-कबी-रतुन् इल्ला अलल-ख़ाशिअीन 
    और (मुसीबत के वक्त) सब्र और नमाज़ का सहारा पकड़ो और अलबत्ता नमाज़ कठिन तो है, किन्तु उन लोगों के लिए नहीं जिनके दिल पिघले हुए हो।
  • (46). अल्लज़ी-न यजुन्नू-न अन्नहुम-मुलाकू रब्बिहिम् व अन्नहुम् इलैहि राजिअून ○*
    कि वह अपने रब की बारगाह में हाज़िर होंगे और ज़रूर उसकी तरफ लौट जाएँगे।
  • (47). या बनी इस्राईलज्कुरू निअ्मतियल्लती अन्अम्तु अलैकुम् व अन्नी फज्जल्तुकुम् अलल् आलमीन 
    ऐ इसराईल की सन्तान! मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंने पहले तुम्हें दी और ये (भी तो सोचो) कि मैंने तुम्हें सारे संसार पर श्रेष्ठता प्रदान की थी।
  • (48). वत्तकू यौमल्ला तज्ज़ी नफ्सुन् अन्नफ्सिन् शैअंव व ला युक्बलु मिन्हा शफ़ा-अतुंव – व ला युअ्-खजु मिन्हा अद्लुंव व ला हुम् युन्सरून 
    और उस दिन से डरो, जिस दिन कोई किसी के कुछ काम नहीं आयेगा और न उसकी तरफ से कोई सिफारिश मानी जाएगी और न उसका कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न उन्हें कोई सहायता मिल सकेगी।
  • (49). व इज नज्जैनाकुम मिन् आलि फिरऔ-न यसूमू-नकुम् सूअल-अज़ाबि युज़ब्बिहू-न अब्ना-अकुम् व यस्तह्यू-न निसा-अकुम् व फी ज़ालिकुम बलाउम् मिर्रब्बिकुम् अ़जी़म 
    और (उस वक्त को याद करो) जब हमने तुम्हें (तुम्हारे बुर्ज़गो को) फिरऔन (के पन्जे) से मुक्ति दिलाई जो तुम्हें बड़े-बड़े दुख दे के सताते थे। तुम्हारे लड़कों पर छुरी फेरते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के लिए) ज़िन्दा रहने देते थे और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारे सब्र की) सख्त आज़माइश थी।
  • (50). व इज् फ़-रक्ना बिकुमुल्-बह्-र फ़-अन्जैनाकुम् व अग्-रक्ना आ-ल फ़िरऔ-न व अन्तुम् तन्ज़ुरून 
    और याद करो जब हमने तुम्हारे लिए सागर को फाड़ दिया, और तुम्हारे देखते-देखते फ़िरऔनियों को डुबो दिया।
  • (51). व इज् वाअ़दना मूसा अर्-बअी़-न लै-लतन् सुम्मत्तखज्तुमुल्-अिज्-ल मिम्-बअ्दिही व अन्तुम् ज़ालिमून 
    और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को अपना देवता बना बैठे, तुम अत्याचारी थे।
  • (52). सुम्-म अ़फौना अ़न्कुम मिम्-बअदि ज़ालि-क लअल्लकुम् तश्कुरून 
    हालाँकि तुम अपने ऊपर जुल्म जोत रहे थे फिर इसके पश्चात भी हमने तुम्हें क्षमा किया, ताकि तुम कृतज्ञता दिखालाओ।
  • (53). व इज् आतैना मूसल-किता-ब वल्फुरका-न लअल्लकुम् तह्तदून 
    और (याद करो) जब मूसा को (तौरात) अता की और हक़ और बातिल को जुदा करनेवाला क़ानून प्रदान किया, ताके तुम सीधी डगर पा सको।
  • (54). व इज् का-ल मूसा लिक़ौमिही या कौमि इन्नकुम् ज़-लम्तुम अन्फु-सकुम् बित्तिख़ाज़िकुमुल्-अिज्-ल फ़तूबू इला बारिइकुम् फक्-तुलू अन्फु-स-कुम् , जा़लिकुम् खैरूल्लकुम् अिन्-द बारिइकुम्, फ़ता – ब अलैकुम इन्नहू हुवत्तव्वाबुर्रहीम 
    और (याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ऐ मेरी क़ौम तुमने बछड़े को (ख़ुदा) बना के अपने ऊपर बड़ा सख्त जुल्म किया तो अब (इसके सिवा कोई चारा नहीं कि) तुम अपने ख़ालिक की बारगाह में क्षमा याचना करो और वह ये है कि आपस में एक-दूसरे को वध करो।  तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है, फिर जब तुमने ऐसा किया तो खुदा ने तुम्हारी तौबा कुबूल कर ली वास्तव में, वह बड़ा मेहरबान माफ़ करने वाला है।
  • (55). व इज् कुल्तुम् या मूसा लन्-नुअ्-मिन-ल-क हत्ता नरल्ला-ह जह्-रतन् फ़-अ खज़त्कुमुस्साअि-कतु व अन्तुम् तन्जु़रून 
    और (याद करो) जब तुमने मूसा से कहा था कि ऐ मूसा हम तुम पर उस वक्त तक ईमान न लाएंगे जब तक हम  अल्लाह को आँखों से देख नहीं लेंगे, उस पर तुम्हें बिजली ने धर लिया, और तुम तकते ही रह गए।
  • (56). सुम्-म बअस्नाकुम् मिम्-बअ्दि मौतिकुम् लअ़ल्लकुम् तश्कुरून 
    फिर तुम्हें तुम्हारे मरने के बाद हमने जीवित कर दिया,  ताकि तुम हमारा उपकार मानो।
  • (57). व जल्लल्ना अलैकुमुल्-ग़मा-म व अन्ज़ल्ना अलैकुमुल्मन्-न वस्सल्वा, कुलू मिन् तय्यिबाति मा रज़क्नाकुम्, व मा ज़-लमूना व लाकिन् कानू अन्फु-सहुम् यज्लिमून 
    और हमने तुम पर बादलों की छाँव की और तुम पर मन व सलवा[1] उतारा और (ये भी तो कह दिया था कि) जो सुथरी व नफीस चीज़ों तुम्हें दी हैं उन्हें शौक़ से खाओ, और उन लोगों ने हमारा तो कुछ बिगड़ा नहीं, परन्तु वे स्वयं अपने ऊपर ही अत्याचार कर रहे थे।
  • (58). व इज् कुल्नद्ख़ुलू हाज़िहिल् कर-य-त
    फकुलू मिन्हा हैसू शिअ्तुम र-गदंव वद्खुलुल-बा-ब सुज्जदंव व-कूलू हित्ततुन् नगफिर लकुम ख़तायाकुम्, व स-नज़ीदुल् मुह्सिनीन 

    और (याद करो) जब हमने तुमसे कहा कि इस बस्ती में जाओ और इसमें जहाँ चाहो मनमानी से खाओ (पियो) और दरवाज़े पर सजदा करते हुए और ज़बान से क्षमा-क्षमा कहते हुए आओ तो हम तुम्हारे पापों को क्षमा कर देंगे और हम नेकी करने वालों की नेकी (सवाब) बढ़ा देगें।
  • (59). फ-बद्-दल्-लज़ी-न ज़-लमू कौलन् गैरल्लज़ी की-ल लहुम् फ़-अन्ज़ल्ना अलल्लज़ी-न ज़लमू रिज्ज़म् – मिनस्-समा-इ बिमा कानू यफ्सुकून ○*
    तो जो बात उनसे कही गई थी उसे इन अत्याचारियों ने बदलकर दूसरी बात कहनी शुरू कर दी तब हमने उन लोगों पर जिन्होंने शरारत की थी उनकी अवज्ञा की वजह से आसमानी प्रकोप उतार दिया।
  • (60). व इज़िस्तस्का मूसा लिक़ौमिही फ़-कुल्नजरिब् बिअसाकल् ह-ज-र , फ़न्-फ़-जरत् मिन्हुस्-नता अश्र-त अैनन्, कद् अलि-म कुल्लु उनासिम् मश्र-बहुम् , कुलू वश्रबू मिर्रिज़किल्लाहि व ला तअ्सौ फिलअर्ज़ि मुफ्सिदीन 
    और (याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति के लिए पानी माँगा तो हमने कहा (ऐ मूसा) अपनी लाठी पत्थर पर मारो (लाठी मारते ही) उसमें से बारह सोते फूट पड़े और सब लोगों ने अपना-अपना घाट बखूबी जान लिया और हमने आम इजाज़त दे दी कि खुदा की दी हुई रोज़ी से खाओ पियो और मुल्क में उपद्रव न करते फिरो।

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