सूरह अल-मुतफ्फिफीन हिंदी में​

सूरह अल-मुतफ्फिफीन

सूरह मुतफ्फिफीन का मतलब “नाप तौल में कमी करने वाला” होता है। यह सूरह कुरान के 30वें पारा में 83वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है। इसमे कुल 36 आयतें और कुल 1 रुकू है।

सूरह अल-मुतफ्फिफीन हिंदी में

अ ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम
बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

  1. वैलुल् – लिल् – मुतफ़्फ़िफीन
  2. अल्लज़ी – न इज़क्तालू अलन्नासि यस्तौफून
  3. व इज़ा कालूहुम् अव्व – ज़नूहुम् युख़्सिरून
  4. अला यजुन्नु उलाइ – क अन्नहुम् मब्अूसून
  5. लियौमिन अ़ज़ीम
  6. यौ – म यकूमुन्नासु लिरब्बिल् – आ़लमीन
  7. कल्ला इन् – न किताबल् – फुज्जारि लफ़ी सिज्जीन
  8. व मा अद्रा – क मा सिज्जीन9. किताबुम् – मकूम
  9. वैलुंय्यौमइज़िल् – लिल् मुकज़्ज़िबीन
  10. अल्लज़ी – न युकज़्ज़िबू – न बियौमिद्दीन
  11. व मा युकज़्ज़िबु बिही इल्ला कुल्लु मुअ् – तदिन् असीम
  12. इज़ा तुत्ला अ़लैहि आयातुना का़ – ल असातीरुल – अव्वलीन
  13. कल्ला बल् – रा – न अ़ला कुलूबिहिम् – मा कानू यक्सिबून
  14. कल्ला इन्नहुम् अर्रब्बिहिम् यौमइज़िल – लमह्जूबून
  15. सुम् – म इन्नहुम् लसालुल – जहीम
  16. सुम्म युका़लु हाज़ल्लज़ी कुन्तुम् बिही तुकज़्ज़िबून
  17. कल्ला इन् – न किताबल् – अबरारि लफ़ी अिल्लिय्यीन
  18. व मा अद्रा – क मा अ़िल्लिय्यून
  19. किताबुम् -मरकूम
  20. यश् – हदुहुल् – मुक़र्रबून
  21. इन्नल् – अब्रा – र लफ़ी नअ़ीम
  22. अ़लल् अरा – इकि यन्जुरून
  23. तअ्रिफु फ़ी वुजूहिहिम् नज् – रतन् – नअ़ीम
  24. युस्कौ – न मिर्रहीकिम् – मख़्तूम
  25. खितामुहू मिस्क, व फ़ी ज़ालि – क फ़ल्य – तनाफ़सिल – मु – तनाफ़िसून
  26. व मिज़ाजुहू मिन् तस्नीम
  27. अनंय् – यश्रबु बिहल – मुकर्रबून
  28. इन्नल्लज़ी – न अज्रमू कानू मिनल्लज़ी – न आमनू यज् – हकून
  29. व इज़ा मररू बिहिम् य – तगा़ – मजून
  30. व इज़न् – क़ – लबू इला अह़्लिहिमुन्क – लबू फ़किहीन
  31. व इज़ा रऔहुम् का़लू इन् – न हा – उला – इ लज़ाल्लून
  32. व मा उर्सिलू अ़लैहिम् हाफ़िज़ीन
  33. फल्यौ मल्लज़ी – न आमनू मिनल् – कुफ़्फारि यज़्हकून
  34. अ़लल् – अरा – इकि यन्जुरून
  35. हल् सुव्विबल – कुफ़्फारु मा कानू यफ़अलून

सूरह अल-मुतफ्फिफीन वीडियो

सूरह अल-मुतफ्फिफीन का तर्जुमा हिंदी में

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, रह्म करने वाला है।

  1. वैलुल् – लिल् – मुतफ़्फ़िफीन
    ख़राबी है कमी करने वालों के लिए
  2. अल्लज़ी – न इज़क्तालू अलन्नासि यस्तौफून
    जो ( लोगों से ) माप कर लें तो पूरा भर कर लें
  3. व इज़ा कालूहुम् अव्व – ज़नूहुम् युख़्सिरून
    और जब ( दूसरों को ) माप कर या तोल कर दें तो घटा कर दें।
  4. अला यजुन्नु उलाइ – क अन्नहुम् मब्अूसून
    क्या यह लोग ख़याल नहीं करते कि वह उठाए जाने वाले हैं
  5. लियौमिन अ़ज़ीम
    एक बड़े दिन
  6. यौ – म यकूमुन्नासु लिरब्बिल् – आ़लमीन
    जिस दिन लोग खड़े होंगे तमाम जहानों के रब के सामने।
  7. कल्ला इन् – न किताबल् – फुज्जारि लफ़ी सिज्जी
    हरगिज नहीं , बेशक बदकारों का आमाल नामा सिज्जीन में है।
  8. व मा अद्रा – क मा सिज्जीन
    और तुझे क्या ख़बर कि सिज्जीन क्या है?
  9. किताबुम् – मकूम
    एक लिखी हुई किताब
  10. वैलुंय्यौमइज़िल् – लिल् मुकज़्ज़िबीन
    उस दिन ख़राबी है झुटलाने वालों के लिए
  11. अल्लज़ी – न युकज़्ज़िबू – न बियौमिद्दीन
    जो लोग झुटलाते है। रोज़े जज़ा ओ सज़ा को।
  12. व मा युकज़्ज़िबु बिही इल्ला कुल्लु मुअ् – तदिन् असीम
    और उसे नहीं झुटलाता मगर हद से बढ़ जाने वाला गुनाहगार
  13. इज़ा तुत्ला अ़लैहि आयातुना का़ – ल असातीरुल – अव्वलीन
    जब पढ़ी जाती हैं उस पर हमारी आयतें तो कहेः यह पहलों की कहानियां है।
  14. कल्ला बल् – रा – न अ़ला कुलूबिहिम् – मा कानू यक्सिबून
    हरगिज़ नहीं , बल्कि जंग पकड़ गया है उन के दिलों पर ( उस के सबब ) जो वह कमाते थे।
  15. कल्ला इन्नहुम् अर्रब्बिहिम् यौमइज़िल – लमह्जूबून
    हरगिज़ नहीं , वह उस दिन अपने रब की दीद से रोक दिए जाएंगे।
  16. सुम् – म इन्नहुम् लसालुल – जहीम
    फिर बेशक वह जहन्नम में दाख़िल होने वाले हैं।
  17. सुम्म युका़लु हाज़ल्लज़ी कुन्तुम् बिही तुकज़्ज़िबून
    फिर कहा जाएगा कि यह वही है ,जिस को तुम झुटलाते थे।
  18. कल्ला इन् – न किताबल् – अबरारि लफ़ी अिल्लिय्यीन
    हरगिज़ नहीं , बेशक नेक लोगों का आमाल नामा “इल्लियीन” में है।
  19. व मा अद्रा – क मा अ़िल्लिय्यून
    और तुझे क्या ख़बर कि इल्लियीन क्या है?
  20. किताबुम् -मरकूम
    एक किताब है लिखी हुई।
  21. यश् – हदुहुल् – मुक़र्रबून
    ( उसे ) देखते हैं ( अल्लाह के ) मुक़र्रब ( नज़दीक वाले ) |
  22. इन्नल् – अब्रा – र लफ़ी नअ़ीम
    बेशक नेक बन्दे नेमतों में होंगे।
  23. अ़लल् अरा – इकि यन्जुरून
    तख़्तों ( मुस्नदों ) पर ( बैठे ) देखते होंगे ,
  24. तअ्रिफु फ़ी वुजूहिहिम् नज् – रतन् – नअ़ीम
    तू उन के चेहरों पर नेमत की तरोताज़गी पाएगा |
  25. युस्कौ – न मिर्रहीकिम् – मख़्तूम
    उन्हें पिलाई जाती है ख़ालिस शराब मुहर बन्द
  26. खितामुहू मिस्क, व फ़ी ज़ालि – क फ़ल्य – तनाफ़सिल – मु – तनाफ़िसून
    उस की मुहूर मुश्क पर जमी हुई ( से लगी हुई ) और चाहिए कि बाज़ी ले जाने की तमन्ना रखने वाले इस में बाज़ी ले जाने की कोशिश करें।
  27. व मिज़ाजुहू मिन् तस्नीम
    और उस में मिलावट है तस्नीम की ,
  28. अनंय् – यश्रबु बिहल – मुकर्रबून
    यह एक चश्मा है जिस से मुकर्रब पीते हैं।
  29. इन्नल्लज़ी – न अज्रमू कानू मिनल्लज़ी – न आमनू यज् – हकून
    बेशक जिन लोगों ने जुर्म किया ( गुनाहगार ) वह मोमिनों पर हँसते थे |
  30. व इज़ा मररू बिहिम् य – तगा़ – मजून
    और जब उन से हो कर गुज़रते तो आँख मारते
  31. व इज़न् – क़ – लबू इला अह़्लिहिमुन्क – लबू फ़किहीन
    और जब अपने घर वालों की तरफ लौटते तो हँसते ( वातें बनाते ) लौटते
  32. व इज़ा रऔहुम् का़लू इन् – न हा – उला – इ लज़ाल्लून
    और जब उन्हें देखते तो कहतेः बेशक यह लोग गुमराह है .
  33. व मा उर्सिलू अ़लैहिम् हाफ़िज़ीन
    और वह उन पर निगहबान बना कर नहीं भेजे गए।
  34. फल्यौ मल्लज़ी – न आमनू मिनल् – कुफ़्फारि यज़्हकून
    पस आज ईमान वाले काफिरों पर हँसते हैं।
  35. अ़लल् – अरा – इकि यन्जुरून
    तख्तों ( मसहरियों ) पर बैठे देखते है।
  36. हल् सुव्विबल – कुफ़्फारु मा कानू यफ़अलून
    क्या मिल गया काफ़िरों को बदला का जो वह करते थे।

Surah Al-Mutaffifin Urdu Tarjuma

Surah Al-Mutaffifin in Arabic

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