सूरह अश शुअरा में 227 आयतें और ग्यारह रुकु हैं। यह सूरह पारा 19 में है। यह सूरह मक्के में नाजिल हुई।
इस सूरह का नाम रखने का कारण आयत 224 “रहे कवि (शुअरा), तो उनके पीछे बहके हुए लोग चला करते हैं,” से लिया गया है।
सूरह अश शुअरा हिंदी में | Surat Ash-Shuara in Hindi
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहिम
शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
- ता-सीम्-मीम्
ता सीन मीम (1) - तिल् क आयातुल् किताबिल्-मुबीन
ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें हैं (2) - लअ़ल्ल – क बाखिअुन् – नफ़्स क अल् ला यकूनू मुअ्मिनीन
(ऐ रसूल) शायद तुम (इस फिक्र में)अपनी जान हलाक कर डालोगे कि ये (कुफ्फार) मोमिन क्यो नहीं हो जाते (3) - इन् न – शअ् नुनज़्ज़िल् अ़लैहिम् मिनस्समा – इ आ – यतन् फ़- ज़ल्लत अअ्नाकुहुम् लहा ख़ाज़िईन
अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई ऐसा मौजिज़ा नाजि़ल करें कि उन लोगों की गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ (4) - इन् न – शअ् नुनज़्ज़िल् अ़लैहिम् मिनस्समा – इ आ – यतन् फ़- ज़ल्लत अअ्नाकुहुम् लहा ख़ाज़िईन
और (लोगों का क़ायदा है कि) जब उनके पास कोई कोई नसीहत की बात ख़ुदा की तरफ़ से आयी तो ये लोग उससे मुँह फेरे बगै़र नहीं रहे (5) - फ़- क़द् कज़्ज़बू फ़ – सयअ्तीहिम् अम्बा – उ मा कानू बिही यस्तह्ज़िऊन
उन लोगों ने झुठलाया ज़रुर तो अनक़रीब ही (उन्हें) इस (अज़ाब) की हक़ीकत मालूम हो जाएगी जिसकी ये लोग हँसी उड़ाया करते थे (6) - अ – व लम् यरौ इलल् – अर्ज़ि कम् अम्बतना फ़ीहा मिन् कुल्लि ज़ौजिन् करीम
क्या इन लोगों ने ज़मीन की तरफ़ भी (ग़ौर से) नहीं देखा कि हमने हर रंग की उम्दा उम्दा चीजे़ं उसमें किस कसरत से उगायी हैं (7) - इन् – न फ़ी ज़ालि- क लआ यतन्, व मा का-न अक्सरुहुम् मुअ्मिनीन
यक़ीनन इसमें (भी क़ुदरत) ख़ुदा की एक बड़ी निशानी है मगर उनमें से अक्सर इमान लाने वाले ही नहीं (8) - व इन् – न रब्ब – क लहुवल अज़ीजुर्रहीम *
और इसमें शक नहीं कि तेरा परवरदिगार यक़ीनन (हर चीज़ पर) ग़ालिब (और) मेहरबान है (9) - व इज् नादा रब्बु – क मूसा अनिअ्तिल् क़ौमज़्ज़ालिमीन
(ऐ रसूल वह वक़्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने मूसा को आवाज़ दी कि (इन) ज़ालिमों फ़िरऔनयों की क़ौम के पास जाओ (हिदायत करो)(10) - क़ौ-म फिरऔन-न, अला यत्तकून
क्या ये लोग (मेरे ग़ज़ब से) डरते नहीं है (11) - का – ल रब्बि इन्नी अख़ाफु अंय्यु कज़्ज़िबून
मूसा ने अर्ज़ कि परवरदिगार मैं डरता हूँ कि (मुबादा) वह लोग मुझे झुठला दे (12) - व यज़ीकु सद्री व ला यन्तलिकु लिसानी फ़ – अर्सिल् इला हारून
और (उनके झुठलाने से) मेरा दम रुक जाए और मेरी ज़बान (अच्छी तरह) न चले तो हारुन के पास पैग़ाम भेज दे (कि मेरा साथ दे) (13) - व लहुम् अ़लय् – य ज़म्बुन् फ़ अख़ाफु अंय्यक्तुलून
(और इसके अलावा) उनका मेरे सर एक जुर्म भी है (कि मैने एक शख़्स को मार डाला था) (14) - का – ल कल्ला फ़ज़्हबा बिआयातिना इन्ना म-अ़कुम् मुस्तमिअन
तो मैं डरता हूँ कि (शायद) मुझे ये लाग मार डालें ख़ुदा ने कहा हरगिज़ नहीं अच्छा तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ हम तुम्हारे साथ हैं (15) - फ़अ्तिया फिरऔन न फ़कूला इन्ना रसूलु रब्बिल्-आ़लमीन
और (सारी गुफ्तगू) अच्छी तरह सुनते हैं ग़रज़ तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ और कह दो कि हम सारे जहाँन के परवरदिगार के रसूल हैं (और पैग़ाम लाएँ हैं) (16) - अन् अर्सिल् म अ़ना बनी इस्राईल
कि आप बनी इसराइल को हमारे साथ भेज दीजिए (17) - का – ल अलम् नुरब्बि – क फ़ीना वलीदंव् – व लबिस् त फ़ीना मिन् अमुरि क सिनीन
(चुनान्चे मूसा गए और कहा) फ़िरऔन बोला (मूसा) क्या हमने तुम्हें यहाँ रख कर बचपने में तुम्हारी परवरिश नहीं की और तुम अपनी उम्र से बरसों हम मे रह सह चुके हो (18) - व फ़अ़ल् – त फ़अ् – ल – तकल्लती फ़अ़ल् – त व अन् – त मिनल् – काफ़िरीन
और तुम अपना वह काम (ख़ून कि़ब्ती) जो कर गए और तुम (बड़े) नाशुक्रे हो (19) - का – ल फ़अ़ल्तुहा इजंव् – व अ-न मिनज़्ज़ाल्लीन
मूसा ने कहा (हाँ) मैने उस वक़्त उस काम को किया जब मै हालते ग़फलत में था (20) - फ़- फ़र्रतु मिन्कुम् लम्मा ख़िफ़्तुकुम् फ़-व-ह ब ली रब्बी हुक्मंव् -व-ज-अ़-लनी मिनल् – मुर्सलीन
फिर जब मै आप लोगों से डरा तो भाग खड़ा हुआ फिर (कुछ अरसे के बाद) मेरे परवरदिगार ने मुझे नुबूवत अता फरमायी और मुझे भी एक पैग़म्बर बनाया (21) - व तिल् – क निअ् – मतुन् तमुन्नुहा अ़लय् य अन् अ़ब्बत्-त बनी इस्राईल
और ये भी कोई एहसान हे जिसे आप मुझ पर जता रहे है कि आप ने बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा है (22) - का – ल फ़िरऔनु व मा रब्बुल आलमीन
फ़िरऔन ने पूछा (अच्छा ये तो बताओ) रब्बुल आलमीन क्या चीज़ है (23) - का – ल रब्बुस्समावाति वल्अर्ज़ि व मा बैनहुमा, इन् कुन्तुम् मूकिनीन
मूसा ने कहाँ सारे आसमान व ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरम्यिान है (सबका) मालिक अगर आप लोग यक़ीन कीजिए (तो काफी है) (24) - का – ल लिमन् हौलहू अला तस्तमिअून
फ़िरऔन ने उन लोगो से जो उसके इर्द गिर्द (बैठे) थे कहा क्या तुम लोग नहीं सुनते हो (25)
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