सूरह बकरा हिंदी में (पेज 15)​

सूरह बकरा हिंदी में (पेज 15) Surah Al-Baqarah in Hindi

  • (281). वत्तकू यौमन् तुर्जअू-न फीहि इलल्लाहि, सुम् -म तुवफ्फा कुल्लु नफ्सिम् मा क-सबत् व हुम् ला युज्लमून○ *
    और उस दिन से डरो जिस दिन तुम सब के सब ख़ुदा की तरफ़ लौटाये जाओगे फिर जो कुछ जिस शख्स ने किया है उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी ज़रा भी हक़ तलफ़ी न होगी।
  • (282). या अय्युहल्लज़ी-न आमनू इज़ा तदायन्तुम् बिदैनिन् इला अ-जलिम् मुसम्मन् फ़क्तुबूहु, वल्यक्तुब् बैनकुम् कातिबुम् बिल्अदलि, व ला यअ्-ब कातिबुन् अंय्यक्तु -ब कमा अल्ल-महुल्लाहु फल्यक्तुब्, वल्युमलि लिल्लज़ी अलैहिल-हक्कु वल्यत्तकिल्ला-ह रब्बहू व ला यब्खस् मिन्हु शैअन्, फ़ -इन् कानल्लज़ी अलैहिल्हक्कु सफ़ीहन् औ ज़अीफ़न् औ ला यस्ततीअु अंय्युमिल-ल हु-व फ़ल्युमलिल वलिय्युहू बिल्अदलि, वस्तश्हिदू शहीदैनि मिर्रिजालिकुम्, फ-इल्लम् यकू ना रजु लै नि फ़- रजुलुंव्वम्र अतानि मिम्मन् तरजौ-न मिनश्शु-हदा-इ अन् तज़िल-ल इह्दाहुमा फतुज़क्कि-र इह्दाहुमल-उख्रा, व ला यअ्बश्-शु-हदा-उ इज़ा मा दुअू, व ला तस्अमू अन् तक्तुबूहु सगीरन् औ कबीरन् इला अ-जलिही, ज़ालिकुम् अक़्सतु अिन्दल्लाहि व अक् वमु लिश्शहा-दति व अद् ना अल्ला तर्ताबू इल्ला अन् तकू-न तिजारतन् हाज़ि-रतन तुदीरूनहा बैनकम् फलै-स अलैकुम् जुनाहुन् अल्ला तक्तुबूहा, व अश्हिदू इज़ा तबायअ्तुम्, व ला युज़ार्-र कातिबुंव-व ला शहीदुन्, व इन् तफ्अलू फ़-इन्नहू फुसूकुम् बिकुम, वत्तकुल्ला-ह, व युअल्लिमुकुमुल्लाहु, वल्लाहु बिकुल्लि शैइन् अलीम 
    ऐ ईमानदारों जब एक मियादे मुक़र्ररा तक के लिए आपस में क़र्ज क़ा लेन देन करो तो उसे लिखा पढ़ी कर लिया करो और लिखने वाले को चाहिये कि तुम्हारे दरमियान तुम्हारे क़ौल व क़रार को, इन्साफ़ से ठीक ठीक लिखे और लिखने वाले को लिखने से इन्कार न करना चाहिये (बल्कि) जिस तरह ख़ुदा ने उसे (लिखना पढ़ना) सिखाया है उसी तरह उसको भी वे उज़्र (बहाना) लिख देना चाहिये और जिसके ज़िम्मे क़र्ज़ आयद होता है उसी को चाहिए कि (तमस्सुक) की इबारत बताता जाये और ख़ुदा से डरे जो उसका सच्चा पालने वाला है डरता रहे और (बताने में) और क़र्ज़ देने वाले के हुक़ूक़ में कुछ कमी न करे अगर क़र्ज़ लेने वाला कम अक्ल या माज़ूर या ख़ुद (तमस्सुक) का मतलब लिखवा न सकता हो तो उसका सरपरस्त ठीक ठीक इन्साफ़ से लिखवा दे और अपने लोगों में से जिन लोगों को तुम गवाही लेने के लिये पसन्द करो (कम से कम) दो मर्दों की गवाही कर लिया करो फिर अगर दो मर्द न हो तो (कम से कम) एक मर्द और दो औरतें (क्योंकि) उन दोनों में से अगर एक भूल जाएगी तो एक दूसरी को याद दिला देगी, और जब गवाह हुक्काम के सामने (गवाही के लिए) बुलाया जाएं तो हाज़िर होने से इन्कार न करे और क़र्ज़ का मामला ख्वाह छोटा हो या उसकी मियाद मुअय्युन तक की (दस्तावेज़) लिखवाने में काहिली न करो, ख़ुदा के नज़दीक ये लिखा पढ़ी बहुत ही मुन्सिफ़ाना कारवाई है और गवाही के लिए भी बहुत मज़बूती है और बहुत क़रीन (क़यास) है कि तुम आईन्दा किसी तरह के शक व शुबहा में न पड़ो मगर जब नक़द सौदा हो जो तुम लोग आपस में उलट फेर किया करते हो तो उसकी (दस्तावेज) के न लिखने में तुम पर कुछ इल्ज़ाम नहीं है (हॉ) और जब उसी तरह की ख़रीद (फ़रोख्त) हो तो गवाह कर लिया करो और क़ातिब (दस्तावेज़) और गवाह को ज़रर न पहुँचाया जाए और अगर तुम ऐसा कर बैठे तो ये ज़रूर तुम्हारी शरारत है और ख़ुदा से डरो ख़ुदा तुमको मामले की सफ़ाई सिखाता है और वह हर चीज़ को ख़ूब जानता है।
  • (283). व इन् कुन्तुम् अला स-फरिंव्वलम् तजिदू कातिबन् फ़रिहानुम् मकबू-जतुन, फ़-इन अमि-न बअ्जुकुम बअ् जन् फ़ल्युअद्दिल्लज़िअ्तुमि-न अमान – तहू वल्यत्तकिल्ला-ह रब्बहू, व ला तक्तुमुश्शहाद-त, व मंय्यक्तुम्हा फ़-इन्नहू आसिमुन् कल्बुहू, वल्लाहु बिमा तअ्मलू-न अलीम○ *
    और अगर तुम सफ़र में हो और कोई लिखने वाला न मिले (और क़र्ज़ देना हो) तो रहन या कब्ज़ा रख लो और अगर तुममें एक का एक को एतबार हो तो (यूं ही क़र्ज़ दे सकता है मगर) फिर जिस शख्स पर एतबार किया गया है (क़र्ज़ लेने वाला) उसको चाहिये क़र्ज़ देने वाले की अमानत (क़र्ज़) पूरी पूरी अदा कर दे और अपने पालने वाले ख़ुदा से डरे (मुसलमानो) तुम गवाही को न छिपाओ और जो छिपाएगा तो बेशक उसका दिल गुनाहगार है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उसको ख़ूब जानता है।
  • (284). लिल्लाहि मा फ़िस्समावाति व मा फिल्अर्ज़ि व इन् तुब्दू मा फ़ी अन्फुसिकुम् औ तुख्फूहु युहासिब्कुम् बिहिल्लाहु, फ़-यग्फिरू लिमंय्यशा-उ व युअज्जिबु मंय्यशा-उ, वल्लाहु अला कुल्लि शैइन् क़दीर
    जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़) सब कुछ खुदा ही का है और जो कुछ तुम्हारे दिलों में हे ख्वाह तुम उसको ज़ाहिर करो या उसे छिपाओ ख़ुदा तुमसे उसका हिसाब लेगा, फिर जिस को चाहे बख्श दे और जिस पर चाहे अज़ाब करे, और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है।
  • (285). आ-मनर्रसूलु बिमा उन्ज़ि-ल इलैहि मिर्रब्बिही वल्मुअ्मिनून, कुल्लुन् आम-न बिल्लाहि व मलाइ – कतिही व कुतुबिही व रूसुलिही, ला नुफ़र्रिकु बै-न अ-हदिम् मिर्रूसुलिही, व कालू समिअ़ना व अ-तअ्ना गुफ्रान-क रब्बना व इलैकल मसीर
    हमारे पैग़म्बर (मोहम्मद) जो कुछ उनपर उनके परवरदिगार की तरफ से नाज़िल किया गया है उस पर ईमान लाए और उनके (साथ) मोमिनीन भी (सबके) सब ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए (और कहते हैं कि) हम ख़ुदा के पैग़म्बरों में से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते और कहने लगे ऐ हमारे परवरदिगार हमने (तेरा इरशाद) सुना।
  • (286). ला युकल्लिफुल्लाहु नफ्सन् इल्ला वुस्अहा, लहा मा क-सबत् व अलैहा मक्त – सबत,
    रब्बना ला तुआखिज्ना इन् – नसीना औ अख़्तअना, रब्बना व ला तहमिल् अलैना इस्रन् कमा हमल्तहू अलल्लजी-न मिन् कब्लिना, रब्बना व ला तुहम्मिलना मा ला ताक-त लना बिही, वअ्फु अन्ना, वग्फिर लना, वरहम्ना, अन् – त मौलाना फ़न्सुरना अलल् कौमिल काफ़िरीन○*

    और मान लिया परवरदिगार हमें तेरी ही मग़फ़िरत की (ख्वाहिश है) और तेरी ही तरफ़ लौट कर जाना है ख़ुदा किसी को उसकी ताक़त से ज्यादा तकलीफ़ नहीं देता उसने अच्छा काम किया तो अपने नफ़े के लिए और बुरा काम किया तो (उसका वबाल) उसी पर पडेग़ा ऐ हमारे परवरदिगार अगर हम भूल जाऐं या ग़लती करें तो हमारी गिरफ्त न कर ऐ हमारे परवरदिगार हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा हमसे अगले लोगों पर बोझा डाला था, और ऐ हमारे परवरदिगार इतना बोझ जिसके उठाने की हमें ताक़त न हो हमसे न उठवा और हमारे कुसूरों से दरगुज़र कर और हमारे गुनाहों को बख्श दे और हम पर रहम फ़रमा तू ही हमारा मालिक है तू ही काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।
–:सूरह बकरा खत्म:–

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