26 सूरह अश शुअरा हिंदी में पेज 4

सूरह अश शुअरा हिंदी में | Surat Ash-Shuara in Hindi

  1. अन्तुम् व आबाउकुमुल् – अक़्दमून
    या तुम्हारे अगले बाप दादा (करते थे) ये सब मेरे यक़ीनी दुश्मन हैं (76)
  2. फ़- इन्नहुम् अ़दुव्वुल-ली इल्ला रब्बल् आ़लमीन
    मगर सारे जहाँ का पालने वाला जिसने मुझे पैदा किया (वही मेरा दोस्त है) (77)
  3. अल्लज़ी ख़ – ल – कनी फहु व यह्दीन
    फिर वही मेरी हिदायत करता है (78)
  4. वल्लज़ी हु – व युत्अिमुनी व यस्कीन
    और वह शख़्स जो मुझे (खाना) खिलाता है और मुझे (पानी) पिलाता है (79)
  5. व इज़ा मरिज्तु फ़हु व यश्फ़ीन
    और जब बीमार पड़ता हूँ तो वही मुझे शिफ़ा इनायत फरमाता है (80)
  6. वल्लज़ी युमीतुनी सुम् -म युह़्यीन
    और वह वही हे जो मुझे मार डालेगा और उसके बाद (फिर) मुझे जि़न्दा करेगा (81)
  7. वल्लज़ी अत्मअु अंय्यग्फि-र ली खती-अती यौमद्दीन
    और वह वही है जिससे मै उम्मीद रखता हूँ कि क़यामत के दिन मेरी ख़ताओं को बख्श देगा (82)
  8. रब्बि हब् ली हुक्मंव् – व अल्हिक्नी बिस्सालिहीन
    परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर (83)
  9. वज्अ़ल्ली लिसा-न सिद्किन् फ़िल – आख़िरीन
    और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा जि़क्रे ख़ैर क़ायम रख (84)
  10. वज्अ़ल्नी मिंव्व-र सति जन्नतिन् -नईम
    और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहेश्त) के वारिसों में से बना (85)
  11. वग़्फिर् लि – अबी इन्नहू का-न मिनज़्ज़ाल्लीन
    और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है (86)
  12. व ला तुख़्जिनी यौ – म युबअ़सून
    और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना (87)
  13. यौ-म ला यन्फअु मालुंव् – व ला बनून
    जिस दिन न तो माल ही कुछ काम आएगा और न लड़के बाले (88)
  14. इल्ला मन् अतल्ला-ह बि-कल्बिन सलीम
    मगर जो शख़्स ख़ुदा के सामने (गुनाहों से) पाक दिल लिए हुए हाजि़र होगा (वह फायदे में रहेगा) (89)
  15. व उज्लि – फ़तिल् – जन्नतु लिल्मुत्तक़ीन
    और बेहेश्त परहेज़ गारों के क़रीब कर दी जाएगी (90)
  16. व बुर्रि – ज़तिल् – जहीमु लिल्ग़ावीन
    और दोज़ख़ गुमराहों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी (91)
  17. व की – ल लहुम् ऐ-नमा कुन्तुम् तअ्बुदून
    और उन लोगों (एहले जहन्नुम) से पूछा जाएगा कि ख़ुदा को छोड़कर जिनकी तुम परसतिश करते थे (आज) वह कहाँ हैं (92)
  18. मिन् दूनिल्लाहि, हल् यन्सुरूनकुम् औ यन्तसिरून
    क्या वह तुम्हारी कुछ मदद कर सकते हैं या वह ख़ुद अपनी आप बाहम मदद कर सकते हैं (93)
  19. फ़कुब्किबू फ़ीहा हुम् वल्ग़ावून
    फिर वह (माबूद) और गुमराह लोग और शैतान का लशकर (94)
  20. व जुनूदु इब्ली-स अज्मअून
    (ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे (95)
  21. कालू व हुम् फ़ीहा यख़्तसिमून
    और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे (96)
  22. तल्लाहि इन् कुन्ना लफ़ी ज़लालिम् मुबीन
    ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे (97)
  23. इज् नुसव्वीकुम् बिरब्बिल् आलमीन
    कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे (98)
  24. व मा अज़ल्लना इल्लल् – मुज्रिमून
    और हमको बस (उन) गुनाहगारों ने (जो मुझसे पहले हुए) गुमराह किया (99)
  25. फ़मा लना मिन् शाफिईन
    तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं (100)

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