64 सूरह अत-तग़ाबुन हिंदी में​

64 सूरह अत-तग़ाबुन | Surah At Taghabun

सूरह अत-तग़ाबुन में अरबी के 18 आयतें और 2 रुकू है। यह सूरह मदनी है। यह सूरह पारा 28 में है।

सूरह अत-तग़ाबुन हिंदी में | Surah At Taghabun in Hindi

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहिम
शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
  1. युसब्बिहु लिल्लाहि मा फिस्समावाति व मा फिल्अर्ज़ि लहुल्-मुल्कु व लहुल- हम्दु व हु-व अ़ला कुल्लि शैइन् क़दीर
    जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में है (सब) अल्लाह की ही पवित्रता का वर्णन है। उसी की बादशाहत है और तारीफ़ उसी के लिए प्रशंसा है। और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है।
  2. हुवल्लज़ी ख़-ल- क़कुम् फ-मिन्कुम् काफ़िरुंव्-व मिन्कुम् मुअ्मिनुन्, वल्लाहु बिमा तअ्मूल-न बसीर
    वही तो है जिसने तुम लोगों को पैदा किया। कोई तुममें इनकार करनेवाला है और कोई ईमानवाला। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसको देख रहा है।
  3. ख़-लक्स्- समावाति वल्अर्-ज़ बिल्हक़्क़ि व सव्व-रकुम् फ़-अह्स-न सु-व-रकुम् व इलैहिल्-मसीर
    उसी ने सारे आसमान व ज़मीन को सत्य के साथ पैदा किया। और उसी ने तुम्हारी सूरतें बनायीं तो सबसे अच्छी सूरतें बनायीं। और उसी की तरफ़ लौटकर जाना हैं।
  4. यअ्लमु मा फ़िस्- समावाति वल्अर्ज़ि व यअ्लमु मा तुसिर्रु-न व मा तुअ्लिनू – न, वल्लाहु अ़लीमुम् – बिज़ातिस्सुदूर
    जो कुछ सारे आसमान व ज़मीन में है वह (सब) जानता है। और जो कुछ तुम छुपा कर या खुल्लम खुल्ला करते हो उससे (भी) वाकिफ़ है। और अल्लाह तो दिल के भेद तक से आगाह है।
  5. अलम् यअ्तिकुम् न – बउल्लज़ी – न क – फरू मिन् कब्लु फ़-ज़ाक़ू व बा-ल अम्रिहिम् व लहुम् अ़ज़ाबुन् अलीम
    क्या तुम्हें उनकी ख़बर नहीं पहुँची जिन्होंने (तुम से) पहले इनकार किया तो उन्होने अपने काम की सज़ा का (दुनिया में) मज़ा चखा और (आखि़रत में तो) उनके लिए दुःखदायी यातना है।
  6. ज़ालि-क बि-अन्नहू कानत्-तअ्तिहिम् रुसुलुहुम् बिल्बय्यिनाति फ़क़ालू अ-ब-शरुय्-यह्दुनना फ़-क- फ़रू व तवल्लौ वस्तग्नल्लाहु, वल्लाहु गनिय्युन् हमीद
    ये इस वजह से कि उनके पास पैग़म्बर स्पष्ट प्रमाण लेकर आ चुके थे। तो कहने लगे कि क्या आदमी हमारे मार्गदर्शक बनेंगें। अतः उन्होंने इनकार किया और मुँह फेर बैठे। और अल्लाह ने भी (उनकी) परवाह न की। और अल्लाह तो स्वार्थरहित, प्रशंसित है।
  7. ज़-अमल्लज़ी-न क-रू अल्लंय्युब्-असू, कुल् बला व रब्बी ल-तुब्असुन्-न सुम्-म ल-तुनब्ब-उन्न बिमा अ़मिल्तुम्, व ज़ालि-क अ़लल्लाहि यसीर
    काफि़रों का ख़्याल ये है कि ये लोग फिर जीवित नहीं किये जायेंगे। (ऐ रसूल!) तुम कह दो वहाँ अपने परवरदिगार की क़सम तुम ज़रूर उठाए जाओगे। फिर जो जो काम तुम करते रहे वह तुम्हें बता देगा और ये तो अल्लाह पर आसान है।
  8. फ़आमिनू बिल्लाहि व रसूलिही वन्नूरिल्लज़ी अन्ज़ल्ना, वल्लाहु बिमा तअ्मलू-न ख़बीर
    तो तुम अल्लाह और उसके रसूल पर उसी नूर पर ईमान लाओ जिसको हमने उतारा है। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे भली-भाँति सूचित है।
  9. यौ-म यज्मउकुम् लियौमिल्-जम्अि ज़ालि-क यौमुत्-तग़ाबुनि, व मंय्युअ्मिम्-बिल्लाहि व यअ्मल सालिहंय् – युकफ़्फ़िर् अ़न्हु सय्यिआतिही व युद्ख़िल्हु जन्नातिन् तज्री मिन् तह्तिहल्-अन्हारु ख़ालिदी-न फ़ीहा अ-बदन्, ज़ालिकल् फ़ौज़ुल् – अ़ज़ीम
    जब वह क़यामत के दिन तुम सबको जमा करेगा फिर यही हार जीत का दिन होगा। और जो शख़्स अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा काम करे वह उससे उसकी बुराइयाँ दूर कर देगा और उसको (स्वर्ग में) उन बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं। वह उनमें हमेशा आबाद रहेगा, यही तो बड़ी कामयाबी है।
  10. वल्लज़ी-न क- फ़रू व कज़्ज़बू बिआयातिना उलाइ -क अस्हाबुन्नारि ख़ालिदी-न फ़ीहा, व बिअ्सल्-मसीर
    और जो लोग इनकार किया हैं और हमारी आयतों को झुठलाते रहे। यही लोग नरक वासी हैं कि हमेशा उसी में रहेंगे। और वह क्या बुरा ठिकाना है।
  11. मा असा-ब मिम्-मुसी – बतिन् इल्ला बि-इज़्-निल्लाहि, व मंय्युअ्मिम्-बिल्लाहि यह्दि क़ल्बहू, वल्लाहु बिकुल्लि शैइन् अ़लीम
    जब कोई मुसीबत आती है तो अल्लाह की अनुमति से आती है और जो शख़्स अल्लाह पर ईमान लाता है तो अल्लाह उसका मार्गदर्शन करता है। और अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानता है।
  12. व अतीउल्ला-ह व अतीअुर् – रसूल फ़-इन् तवल्लै तुम् फ़-इन्नमा अ़ला रसूलिनल्-बला ग़ुल्- मुबीन
    और अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की इताअत करो। फिर अगर तुमने मुँह फेरा तो हमारे रसूल पर बस स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचा देने ही की ज़िम्मेदारी है।
  13. अल्लाहु ला इला-ह इल्ला हु-व, व अ़लल्लाहि फ़ल्य – तवक्कलिल् – मु अ्मिनून
    अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई वंदनीय नहीं और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
  14. या अय्युहल्लज़ी-न आमनू इन्-न मिन् अज़्वाजिकुम् व औलादिकुम् अ़दुव्वल् – लकुम् फ़हज़रूहुम् व इन् तअ्फ़ू व तस्फ़हू व तग़्फ़िरू फ़-इन्नल्ला-ह ग़फ़ूरुर्रहीम
    ऐ ईमानदारों! तुम्हारी बीवियों और तुम्हारी औलाद में से कुछ तुम्हारे शत्रु हैं। तो तुम उनसे बचे रहो और तुम क्षमा से काम लो तथा सुधार करो। और बख़्श दो तो अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान है।
  15. इन्नमा अम्वालुकुम् व औलादुकुम् फ़ित्- नतुन्, वल्लाहु इन्हू अज्-रून् अ़ज़ीम 
    तुम्हारे धन और तुम्हारी औलादे तो तुम्हारे लिए एक परीक्षा है और अल्लाह के यहाँ तो बड़ा प्रतिफल (मौजूद) है।
  16. फ़त्तक़ुल्ला – ह मस्त – तअ्तुम् वस् मअू व अतीअू व अन्फ़िक़ू ख़ैरल्- लिअन्फुसिकुम्, व मंय्यू – क़ शुह्-ह नफिसही फ़ – उलाइ – क हुमुल् – मुफ़्लिहून
    तो जहाँ तक तुम से हो सके अल्लाह से डरते रहो। और (उसके एहकाम) सुनो और मानों और अपनी बेहतरी के वास्ते (उसकी राह में) ख़र्च करो। और जो शख़्स अपने मन की कंजूसी से बचा लिया गया तो ऐसे ही लोग सफल होने वाले हैं।
  17. इन् तुक्रिज़ुल्ला-ह क़र्ज़न् ह-सनंय् – युज़ाअिफ्हु लकुम् व यग्फिर् लकुम्, वल्लाहु शकूरुन् हलीम
    अगर तुम अल्लाह को उत्तम ऋण(अल्लाह की राह में दान) दोगे तो वह तुम्हें कई गुना बढ़ाकर देगा। और तुमको क्षमा कर देगा और अल्लाह तो बड़ा गुणग्राहक और सहनशील है।
  18. आलिमुल् – गैबि वश्शहा – दतिल् – अ़ज़ीज़ुल् – हकीम
    परोक्ष और प्रत्यक्ष का जानने वाला अति प्रभावी तथा गुणी है।

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