सूरह मुनाफ़िकून हिंदी में​

सूरह मुनाफ़िकून

सूरह मुनाफ़िक़ून कुरान के 28वें पारा में 63वीं सूरह है। सूरह मुनाफिक़ुन (سُورَةُ المُنَافِقُون) का अर्थ पाखंडी है। यह मदनी सूरह है। सूरह मुनाफ़िक़ून मे कुल 11 आयतें और कुल 2 रुकू है।

यह सूरह मदीना में संभवतः 6-7 हिजरी में लगभग 628 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद के बानी अल-मुस्तलिक के खिलाफ अभियान से लौटने पर प्रकट हुआ था।

सूरह मुनाफ़िकून हिंदी में

अ ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम
बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

  1. इज़ा जा-अ-कल मुनाफ़िक़ूना क़ा-लू नश्हदु इन्नका ल रसूलुल्लाह, वल्लाहु यअ्लमु इन्नका ल रसूलुह, वल्लाहु यश्हदु इन्नल मुनाफिक़ी-न ल काज़िबून
  2. इत्तख्ज़ू अये मानहुम जुन्नतन फ सद्दु अन सबीलिल्लाह, इन्नहुम् सा-अ मा कानू यअ्मलून
  3. ज़ालिका बि अन्नहुम् आ मनू सुम्मा कफरू फ तुबिअ अला क़ुलू बिहिम् फ़हुम् ला यफक़हून
  4. व इज़ा र अैतहुम् तुअ्जिबुका अज्सामुहुम्, व इय्य्कूलू तस्मअ् लि क़ौलिहिम्, क अन्नहुम् ख़ुशुबुम् मुसन्नदह्, यह्सबूना कुल्ला सैहतिन अलैहिम्, हुमुल् अदूवु फ़ह् ज़र्हुम्, क़ा-त-ल हुमुल्लाहु अन्ना युअ्फ़कू
  5. व इज़ा क़ी-ल लहुम् तआलौ यस्तग्फिर लकुम् रसूलुल्लाहि लौ वौ रु-ऊसहुम् व-र अैतहुम् य-सुद्दूना व हुम् मुस्तक्बिरून
  6. सबा उन अलैहिम् अस्तग़्फिरता लहुम् अम्लम् क़ौ-मल् फ़ासिक़ीन
  7. हुमुल् लज़ीना यकूलूना ला तुन्फिक़ू अला मन् इन्दा रसूलिल्लाहि हत्ता यंफज्जू, व लिल्लाहि ख़ज़ाइनुस समाबाति वल् अर्ज़ी वला किन्नल् मुनाफ़िक़ीना ला यफ़्क़हून
  8. यक़ूलूना लअिर्रा जअ्ना इलल् मदीनती ला युख्रिजन्नल् अ अज्ज़ु मिन्हल् अ ज़ल्, व लिल्लाहिल् अ़िज़्ज़तु व लि रसूलिही व लिल मुअ्मिनीना व-ला किन्नल् मुनाफ़िकी़ना ला यअ्लमून
  9. या अय्युहल् लज़ीना आमनु ला तुल्हिकुम् अम्वालुकुम् व-ला औलादुकुम् अ़न् ज़िक्रिल्लाह, व मइ यफ़्अल् ज़ालिका फ़ उलाइका हुमुल् ख़ासिरून
  10. व अन्फ़िक़ू मिम्मा रज़क्नाकुम् मिन् क़ब्लि अइ याति-य अ-ह-द-कुमुल् मौतु फ़-य-क़ू-ल रब्बि लौला अख्खर् तनी इला अ-ज-लिन् क़रीब, फ़ अस्सद्द्क़ व अकुम् मिनस् सालिहीन
  11. व लइ युअख्खिरल्लाहु नफ्सन इज़ा जा-अ अ-ज-लुहा, वल्लाहु ख़बीरूम् बिमा तअ्मलून

सूरह मुनाफ़िकून वीडियो

सूरह मुनाफ़िकून का तर्जुमा हिंदी में

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है

  1. इज़ा जा-अ-कल मुनाफ़िक़ूना क़ा-लू नश्हदु इन्नका ल रसूलुल्लाह, वल्लाहु यअ्लमु इन्नका ल रसूलुह, वल्लाहु यश्हदु इन्नल मुनाफिक़ी-न ल काज़िबून
    जब मुनाफ़िक़ (पाखंडी) तुम्हारे पास आते हैं तो कहते हैं कि हम गवाही देते हैं कि आप बेशक अल्लाह के रसूल हैं, और अल्लाह जानता है कि बेशक तुम उसके रसूल हो, और अल्लाह गवाही देता है कि ये मुनाफ़िक्रीन (पाखंडी) झूठे हैं।
  2. इत्तख्ज़ू अये मानहुम जुन्नतन फ सद्दु अन सबीलिल्लाह, इन्नहुम् सा-अ मा कानू यअ्मलून
    उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है, फिर वे रोकते हैं अल्लाह की राह से, बेशक निहायत बुरा है जो वे कर रहे हैं।
  3. ज़ालिका बि अन्नहुम् आ मनू सुम्मा कफरू फ तुबिअ अला क़ुलू बिहिम् फ़हुम् ला यफक़हून
    यह इस सबब से है कि वे ईमान लाए फिर उन्होंने कुफ़ किया, फिर उनके दिलों पर मुहर कर दी गई, पस वे नहीं समझते।
  4. व इज़ा र अैतहुम् तुअ्जिबुका अज्सामुहुम्, व इय्य्कूलू तस्मअ् लि क़ौलिहिम्, क अन्नहुम् ख़ुशुबुम् मुसन्नदह्, यह्सबूना कुल्ला सैहतिन अलैहिम्, हुमुल् अदूवु फ़ह् ज़र्हुम्, क़ा-त-ल हुमुल्लाहु अन्ना युअ्फ़कून
    और जब तुम उन्हें देखो तो उनके जिस्म तुम्हें अच्छे लगते हैं, और अगर वे बात करते हैं तो तुम उनकी बात सुनते हो, गोया कि वे लकड़ियां हैं टेक लगाई हुई। वे हर ज़ोर की आवाज़ को अपने ख़िलाफ़ समझते हैं। यही लोग दुश्मन हैं, पस उनसे बचो। अल्लाह उन्हें हलाक करे, वे कहां फिरे जाते हैं।
  5. व इज़ा क़ी-ल लहुम् तआलौ यस्तग्फिर लकुम् रसूलुल्लाहि लौ वौ रु-ऊसहुम् व-र अैतहुम् य-सुद्दूना व हुम् मुस्तक्बिरून
    और जब उनसे कहा जाता है कि आओ, अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए इस्तिग़फ़ार (माफ़ी की दुआ) करे तो वे अपना सर फेर लेते हैं।
    और तुम उन्हें देखोगे कि वे तकब्बुर (घमंड) करते हुए बेरुख़ी करते हैं।
  6. सबा उन अलैहिम् अस्तग़्फिरता लहुम् अम्लम् क़ौ-मल् फ़ासिक़ीन
    उनके लिए यकसां (समान) है, तुम उनके लिए मग्फ़िरत (माफ़ी) की दुआ करो या मग्फ़िरत की दुआ न करो, अल्लाह हरगिज़ उन्हें माफ़ न करेगा। अल्लाह नाफ़रमान लोगों को हिदायत नहीं देता।
  7. हुमुल् लज़ीना यकूलूना ला तुन्फिक़ू अला मन् इन्दा रसूलिल्लाहि हत्ता यंफज्जू, व लिल्लाहि ख़ज़ाइनुस समाबाति वल् अर्ज़ी वला किन्नल् मुनाफ़िक़ीना ला यफ़्क़हून
    यही हैं जो कहते हैं कि जो लोग अल्लाह के रसूल के पास हैं उन पर ख़र्च मत करो यहां तक कि वे मुंतशिर (तितर-बितर) हो जाएं। और आसमानों और ज़मीन के ख़ज़ाने अल्लाह ही के हैं लेकिन मुनाफ़िक्रीन (पाखंडी) नहीं समझते।
  8. यक़ूलूना लअिर्रा जअ्ना इलल् मदीनती ला युख्रिजन्नल् अ अज्ज़ु मिन्हल् अ ज़ल्, व लिल्लाहिल् अ़िज़्ज़तु व लि रसूलिही व लिल मुअ्मिनीना व-ला किन्नल् मुनाफ़िकी़ना ला यअ्लमून
    वे कहते हैं कि अगर हम मदीना लौटे तो इज़्ज़त वाला वहां से ज़िल्लत वाले को निकाल देगा। हालांकि इज़्जत अल्लाह के लिए और उसके रसूल के लिए और मोमिनीन के लिए है, मगर मुनाफ़िक्रीन (पाखंडी) नहीं जानते।
  9. या अय्युहल् लज़ीना आमनु ला तुल्हिकुम् अम्वालुकुम् व-ला औलादुकुम् अ़न् ज़िक्रिल्लाह, व मइ यफ़्अल् ज़ालिका फ़ उलाइका हुमुल् ख़ासिरून
    ऐ ईमान वालो, तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल न करने पाएं, और जो ऐसा करेगा तो वही घाटे में पड़ने वाले लोग हैं।
  10. व अन्फ़िक़ू मिम्मा रज़क्नाकुम् मिन् क़ब्लि अइ याति-य अ-ह-द-कुमुल् मौतु फ़-य-क़ू-ल रब्बि लौला अख्खर् तनी इला अ-ज-लिन् क़रीब, फ़ अस्सद्द्क़ व अकुम् मिनस् सालिहीन
    और हमने जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें से ख़र्च करो इससे पहले कि तुम में से किसी की मौत आ जाए, फिर वह कहे कि ऐ मेरे रब, तूने मुझे कुछ और मोहलत क्यों न दी कि मैं सदक़ा (दान) करता और नेक लोगों में शामिल हो जाता।
  11. व लइ युअख्खिरल्लाहु नफ्सन इज़ा जा-अ अ-ज-लुहा, वल्लाहु ख़बीरूम् बिमा तअ्मलून
    और अल्लाह हरगिज़ किसी जान को मोहलत नहीं देता जबकि उसकी मीआद (नियत समय) आ जाए, और अल्लाह जानता है जो कुछ तुम करते हो।
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