43 सूरह अज-जुखरूफ हिंदी में पेज 3

सूरह अज-जुखरूफ हिंदी में | Surah Az-Zukhruf in Hindi

  1. व इन्नहू ल-अिल्मुल्-लिस्सा-अ़ति फ़ला तम्तरुन्-न बिहा वत्तबिअूनि, हाज़ा सिरातुम्-मुस्तक़ीम
    और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है तुम लोग इसमें हरगिज़ शक न करो और मेरी पैरवी करो यही सीधा रास्ता है।
  2. व ला यसुद्दन्नकुमुश् – शैतानु इन्नहू लकुम् अ़दुव्युम्-मुबीन
    और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे वही यक़ीनन तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है।
  3. व लम्मा जा-अ ईसा बिल्बय्यिनाति क़ा-ल क़द् जिअ्तुकुम् बिल्-हिक्मति व लि-उबय्यि-न लकुम् बअ्ज़ल्लज़ी तख़्तलिफ़ू-न फ़ीहि फ़त्तक़ुल्ला-ह व अ़तीअून
    और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो (लोगों से) कहा मैं तुम्हारे पास दानाई (की किताब) लेकर आया हूँ ताकि बाज़ बातें जिन में तुम लोग एख़्तेलाफ़ करते थे तुमको साफ़-साफ़ बता दूँ तो तुम लोग अल्लाह से डरो और मेरा कहा मानो।
  4. इन्नल्ला-ह हु-व रब्बी व रब्बुकुम् फ़अ्बुदूहु, हाज़ा सिरातुम्-मुस्तक़ीम
    बेशक अल्लाह ही मेरा और तुम्हार परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो यही सीधा रास्ता है।
  5. फ़ख़्त-लफ़ल्-अह्ज़ाबु मिम्-बैनिहिम् फ़वैलुल्-लिल्लज़ी-न ज़-लमू मिन् अ़ज़ाबि यौमिन् अलीम
    तो इनमें से कई फिरक़े उनसे एख़्तेलाफ़ करने लगे तो जिन लोगों ने ज़़ुल्म किया उन पर दर्दनांक दिन के अज़ब से अफ़सोस है।
  6. हल् यन्ज़ुरू-न इल्लस्सा-अ़-त अन् तअ्ति-यहुम् बग़्-ततंव् व हुम् ला यश्अुरून
    क्या ये लोग बस क़यामत के ही मुन्तज़िर बैठे हैं कि अचानक ही उन पर आ जाए और उन को ख़बर तक न हो।
  7. अल्-अख़िल्ला-उ यौमइज़िम्-बअ्ज़ुहुम् लिबअ्ज़िन् अ़दुव्वुन् इल्लल्-मुत्तक़ीन
    (दिली) दोस्त इस दिन (बाहम) एक दूसरे के दुशमन होगें मगर परहेज़गार कि वह दोस्त ही रहेगें।
  8. या अिबादि ला ख़ौफ़ुन् अ़लैकुमुल्-यौ-म व ला अन्तुम् तह्ज़नून
    और बेशक उनसे कहेगा ऐ मेरे बन्दों आज न तो तुमको कोई ख़ौफ है और न तुम ग़मग़ीन होगे।
  9. अल्लज़ी-न आमनू बिआयातिना व कानू मुस्लिमीन
    (यह) वह लोग हैं जो हमारी आयतों पर ईमान लाए और (हमारे) फ़रमाबरदार थे।
  10. उद्खुलुल्-जन्न-त अन्तुम् व अज़्वाजुकुम् तुह्बरून
    तो तुम अपनी बीवियों समैत एजाज़ व इकराम से बेहिश्त में दाखिल हो जाओ।
  11. युताफ़ु अ़लैहिम् बिसिहाफ़िम्-मिन् ज़-हबिंव्-व अक्वाबिन् व फ़ीहा मा तश्तहीहिल्-अन्फ़ुसु व त-लज़्ज़ुल्- अअ्युनु व अन्तुम् फ़ीहा ख़ालिदून
    उन पर सोने की एक रिक़ाबियों और प्यालियों का दौर चलेगा और वहाँ जिस चीज़ को जी चाहे और जिससे आँखें लज़्ज़त उठाएं (सब मौजूद हैं) और तुम उसमें हमेशा रहोगे।
  12. कुन्तुम् तअ्मलून
    और ये जन्नत जिसके तुम वारिस (हिस्सेदार) कर दिये गये हो तुम्हारी क़ारगुज़ारियों का सिला है।
  13. लकुम् फ़ीहा फ़ाकि-हतुन् कसी-रतुम् मिन्हा तअ्कुलून
    वहाँ तुम्हारे वास्ते बहुत से मेवे हैं जिनको तुम खाओगे।
  14. इन्नल्-मुज्रिमी-न फ़ी अ़ज़ाबि जहन्न-म ख़ालिदून
    (गुनाहगार कुफ़्फ़ार) तो यक़ीकन जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहेगें।
  15. ला युफ़त्-तरु अ़न्हुम् व हुम् फ़ीहि मुब्लिसून
    जो उनसे कभी नाग़ा न किया जाएगा और वह इसी अज़ाब में नाउम्मीद होकर रहेंगें।
  16. व मा ज़लम्नाहुम् व लाकिन् कानू हुमुज़्ज़लिमीन
    और हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया बल्कि वह लोग ख़ुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं।
  17. व नादौ या मालिक़ु लि- यक्ज़ि अ़लैना रब्बु-क, क़ा-ल इन्नकुम् माकिसून
    और (जहन्नुमी) पुकारेगें कि ऐ मालिक (दरोग़ा ए जहन्नुम कोई तरकीब करो) तुम्हारा परवरदिगार हमें मौत ही दे दे वह जवाब देगा कि तुमको इसी हाल में रहना है।
  18. ल-क़द् जिअ्नाकुम् बिल्हक़्क़ि व लाकिन् न अक्स रकुम् लिल्हक़्क़ि कारिहून
    (ऐ कुफ़्फ़ार मक्का!) हम तो तुम्हारे पास हक़ लेकर आयें हैं तुम मे से बहुत से हक़ (बात से चिढ़ते) हैं।
  19. अम् अब्रमू अम्रन् फ़-इन्ना मुब्रिमून
    क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने भी (कुछ ठान लिया है)।
  20. अम् यह्सबू-न अन्ना ला नस्मअु सिर्रहुम् व नज्वाहुम्, बला व रुसुलुना लदैहिम् यक्तुबून
    क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हाँ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं।
  21. क़ुल् इन् का-न लिर्रह्मानि व-लदुन् फ़-अ-न अव्वलुल्- आ़बिदीन
    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर बेशक की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ।
  22. सुब्हा-न रब्बिस्समावाति वल्अर्ज़ि रब्बिल् अ़र्शि अ़म्मा यसिफ़ून
    ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (बेशक) उससे पाक व पाक़ीज़ा है।
  23. फ़-ज़र्हुम् यख़ूज़ू व यल्अ़बू हत्ता युलाक़ू यौमहुमुल्लज़ी यू- अ़दून
    तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है।
  24. व हुवल्लज़ी फ़िस्समा-इ इलाहुंव्-व फ़िल्अर्ज़ि इलाहुन्, व हुवल् हकीमुल् अ़लीम
    उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है।
  25. व तबा-रकल्लज़ी लहू मुल्कुस्समावाति वल्अर्ज़ि व मा बैनहुमा व अिन्दहू अिल्मुस्सा- अ़ति व इलैहि तुर्जअून
    और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे।
  26. व ला यम्लिकुल्- लज़ी-न यद्अू-न मिन् दूनिहिश्- शफ़ा-अ़-त इल्ला मन् शहि-द बिल्हक़्क़ि व हुम् यअ्लमून
    और बेशक के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं वह तो सिफ़ारिश का भी एख़्तेयार नहीं रख़ते मगर (हाँ) जो लोग समझ बूझ कर हक़ बात (तौहीद) की गवाही दें (तो खैर)।
  27. व ल-इन स-अल्-तहुम् मन् ख़-ल-क़हुम ल-यक़ूलुन्नल्लाहु फ़-अन्ना युअ्फ़कून
    और अगर तुम उनसे पूछोगे कि उनको किसने पैदा किया तो ज़रूर कह देगें कि अल्लाह ने फिर (बावजूद इसके) ये कहाँ बहके जा रहे हैं।
  28. व क़ीलिही या रब्बि इन्-न हा उला-इ क़ौमुल्ला युअ्मिनून
    और (उसी को) रसूल के उस क़ौल का भी इल्म है कि परवरदिगार ये लोग हरगिज़ ईमान न लाएँगे।
  29. फ़स्फ़ह् अ़न्हुम् व क़ुल् सलामुन्, फ़सौ-फ़ यअ्लमून
    तो तुम उनसे मुँह फेर लो और कह दो कि तुम को सलाम तो उन्हें अनक़रीब ही (शरारत का नतीजा) मालूम हो जाएगा।

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