सूरह नबा हिंदी में​

सूरह अन-नबा

सूरह नबा का मतलब “ख़बर” होता है। सूरह नबा कुरान के 30वें पारा में 78वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है। सूरह नबा में कुल 40 आयतें, कुल रुकू, कुल 174 शब्द है।

इसका विषय है क़यामत और आख़िरत की पुष्टि और उसको मानने या न मानने के परिणामों से लोगों को सावधान करना। मक्का में जब आरम्भ मे अल्लाह के रसूल (सल्ल0) ने इस्लाम के प्रचार का आरम्भ किया तो वह तीन चीज़ों पर आधारित थाः ऐकश्वरवाद, हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) की पैग़म्बरी और आख़िरत

इन तीनों चीज़ों में से पहली दो चीजें भी यद्यपि मक्का वालों को अत्यन्त अप्रिय के लिए उतनी ज़्यादा उलझन का कारण न थीं, जितनी तीसरी बात थी।

इसको जब उन लोगो सामने पेश किया गया तो उन्होंने सबसे ज़्यादा उसी की हँसी उड़ाई। किन्तु इस्लाम की राह पर उनको लाने के लिए यह बिल्कुल आवश्यक था कि आखिरत की धारणा उनके मन में उतारी जाए, क्योंकि इस धारणा को स्वीकार किए बिना यह सम्भव ही न था कि सत्य और असत्य के मामले में उनके सोचने के ढंग में गंभीरता आ सकती।

Surah Naba Video in Arabic

सूरह नबा हिंदी में

अ ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम
बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

  1. अम्मा यतासा अ लून◌
  2. अनिन नबाअिल अज़ीम◌
  3. अल्लज़ी हुम फीहि मुख्तलिफून◌
  4. कल्ला सा यअ ल मून◌
  5. सुम्मा कल्ला सा यअ ल मून◌
  6. अलम नज अलिल अर्दा मिहादा◌
  7. वल ज़िबाला औतादा◌
  8. व खलक़ ना कुम अज़ वाजा◌
  9. वजा अलना नौ म कुम सुबाता◌
  10. वजा अल्नल लै ल लिबासा◌
  11. वजा अल्नन नहा र म आशा◌
  12. वबा नैइ ना फौ क़ कुम सब अन शिदादा◌
  13. वजा अलना सिराजौं वह्हाजा◌
  14. व अन्ज़लना मिनल मु अ सिराति मा अन सज्जाजा◌
  15. लिनुखरिज़ा बिही हब्बऔ व नबाता◌
  16. व जन्नातिन अल्फाफा◌
  17. इन्ना यौमल फसलि का न मी क़ाता◌
  18. यौमा युन् फखु फिस सूरि फतअ तूना अफ् वाजा◌
  19. व फुतिहतिस् समाउ फ कानत अब् वाबा◌
  20. व सुय्यीरतिल जिबालु फ कानत सराबा◌
  21. इन्ना जहन्नमा कानत मिर सादा◌
  22. लित् त्वागीना म आबा◌
  23. ला बिसीना फी हा अह क़ाबा◌
  24. ला यज़ू कूना फीहा बरदौं वला शराबा◌
  25. इल्ला हमीमौओं व गस्साक़ा◌
  26. जजा औं वि फाक़ा◌
  27. इन्नहुम कानू ला यर्जूना हिसाबा◌
  28. व कज्ज़बू बि आयातिना किज़्ज़ाबा◌
  29. व कुल्ला शैइन अह सैइनाहू किताबा◌
  30. फ ज़ूकू फ लन नजी’दकुम इल्ला अज़ाबा◌
  31. इन्ना लिल मुत्तकीना मफाज़ा◌
  32. हदाइका व अअ् नाबा◌
  33. व कवाइबा अतराबा◌
  34. व कअ्सन दिहाक़ा◌
  35. ला यस मऊना फीहा लग वौ वला किज़्ज़ाबा◌
  36. जज़ाअम मिर् रब्बिका अता अन हिसाबा◌
  37. रब्बिस् समावाती वल अर्दी वमा बै’नहुमर् रहमानि ला यम्लिकूना मिन्हु खिताबा◌
  38. यौमा यकूमुर् रुहु वल् मलाइकतु सफ्फा, ला यता कल्लामूना इल्ला मन अजि न लहुर् रहमानु व क़ाला सवाबा◌
  39. ज़ालिकल यौमुल हक्क़, फ मन शा’अत् त ख ज इला रब्बिही म आबा◌
  40. इन्ना अंज़र ना कुम अज़ाबन क़रीब, यौ म यंजुरुल मर उ मा कद् दमत यदाहु व यकूलुल् काफिरु या लैतनी कुन्तु तुराबा◌

Surah Naba Urdu Tarjuma Video ​

सूरह नबा का हिंदी तर्जुमा

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान , रहम करने वाला है।

  1. अम्मा यतासा अ लून
    लोग किस चीज़ के बारे में पूछ रहे हैं।
  2. अनिन नबाअिल अज़ीम
    उस बड़ी ख़बर के बारे में,
  3. अल्लज़ी हुम फीहि मुख्तलिफून
    जिसमें वे लोग इख्तिलाफ़ कर हैं।
  4. कल्ला सा यअ ल मून
    हरगिज़ नहीं, अनक़रीब वे जान लेंगे।
  5. सुम्मा कल्ला सा यअ ल मून
    फिर, हरगिज़ नहीं, अनक़रीब वे जान लेंगे।
  6. अलम यज अलिल अर्दा मिहादा
    क्या हमने ज़मीन को बिछौना (फ़र्श) नहीं बनाया
  7. वल ज़िबाला औतादा
    और पहाड़ों को मेख़ें।
  8. व् खलक़ ना कुम अज़ वाजा
    और तुम्हें हमने जोड़े जोड़े पैदा किया,
  9. वजा अलना नौ म कुम सुबाता
    और नींद को बनाया तुम्हारी थकान दूर करने के लिए।
  10. वजा अल्नल लै ल लिबासा
    और हमने रात को पर्दा बनाया
  11. वजा अल्नन नहा र म आशा
    और हमने दिन को मआश (जीविका) का वक़्त बनाया।
  12. वबा नैइ ना फौ क़ कुम सब अन शिदादा
    और हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत आसमान बनाए।
  13. वजा अलना सिरजौं वह्हाजा
    और हमने उसमें एक चकमता हुआ चराग रख दिया।
  14. व अन्जलना मिनल मु अ सिराति मा अन सज्जाजा
    और हमने पानी भरे बादलों से मूसलाधार पानी बरसाया
  15. लिनुखरिज़ा बिही हब्बऔ व नबाता
    ताकि हम उसके ज़रिए से उगाएं गल्ला और सब्जी।
  16. व जन्नातिन अल्फाफा
    और पत्तों में लिफ्टे हुए बाग।
  17. इन्ना यौमल फसलि का न मी क़ाता
    बेशक फ़ैसले का दिन एक मुक़र्रर वक़्त है।
  18. यौमा युन् फखु फिस सूरि फतअ तूना अफ् वाजा
    जिस दिन सूर फूंका जाएगा, फिर तुम गिरोह दर गिरोह चले आओगे।
  19. व फुतिहतिस् समाउ फ कानत अब् वाबा
    और आसमान खोल दिया जाएगा, फिर उसमें दरवाज़े ही दरवाज़े हो जाएंगे।
  20. व सुय्यीरतिल जिबालु फ कानत सराबा
    और पहाड़ चला दिए जाएंगे तो वे रेत की तरह हो जाएंगे।
  21. इन्ना जहान्नमा कानत मिर सादा
    बेशक जहन्नम घात है
  22. लित् त्वागीना म आबा
    सरकशों का ठिकाना,
  23. ला बिसीना फी हा अह क़ाबा
    उसमें वे मुद्दतों पड़े रहेंगे।
  24. ला यजू कूना फीहा बरदौं वला शराबा
    उसमें वे न किसी ठंडक को चखेंगे और न पीने की चीज़,
  25. इल्ला हमीमौओं व गस्साक़ा
    मगर गर्म पानी और बहती पीप,
  26. जजा औं वि फाक़ा
    यह पूरा पूरा बदला होगा
  27. इन्नहुम कानू ला यर्जूना हिसाबा
    वे हिसाब का अंदेशा नहीं रखते थे।
  28. व कज्ज़बू बि आयातिना किज़्ज़ाबा
    और हमारी आयतों को झुठलाते थे झूठ जानकर।
  29. व कुल्ला शैइन अह सैइनाहू किताबा
    और हमने हर चीज़ को लिखकर शुमार कर रखा है।
  30. फ ज़ूकू फ लन नजी’दकुम इल्ला अजाबा
    पस मज़ा चखो कि हम तुम्हारी सज़ा ही बढ़ाते जाऐँगे।
  31. इन्ना लिल मुत्तकीना मफाज़ा
    बेशक डरने वालों परहेजगारों के लिए कामयाबी है।
  32. हदाइका व अअ् नाबा
    बाग़ और अंगूर।
  33. व कवाइबा अतराबा
    और नौजबान औरतें हम उम्र।
  34. व कअ्सन दिहाक़ा
    और भरे हुए जाम।
  35. ला यस मऊना फीहा लग वौ वला किज़्ज़ाबा
    वहां वे लग्व (घटिया, निरर्थक) और झूठी बात न सुनेंगे।
  36. जज़ाअम मिर् रब्बिका अता अन हिसाबा
    बदला तेरे रब की तरफ़ से होगा, उनके अमल के हिसाब से
  37. रब्बिस् समावाती वल अर्दी वमा बै’नहुमर् रहमानि ला यम्लिकूना मिन्हु खिताबा
    रहमान की तरफ़ से जो आसमानों और ज़मीन और उनके दर्मियान की चीज़ों का रब है, कोई कुदरत नहीं रखता कि उससे बात करे।
  38. यौमा यकूमुर् रुहु वल् मलाइकतु सफ्फा, ला यता कल्लामूना इल्ला मन अजि न लहुर् रहमानु व क़ाला सवाबा
    जिस दिन रूह और फ़रिश्ते सफ़बस्ता (पंक्तिबद्ध) खड़े होंगे, कोई न बोलेगा मगर जिसे रहमान इजाजत दे, और वह ठीक बात कहेगा।
  39. ज़ालिकल यौमुल हक्क़, फ मन शा’अत् त ख ज इला रब्बिही म आबा
    यह दिन बरहक़ है, पस जो चाहे अपने रब की तरफ़ ठिकाना बना ले।
  40. इन्ना अंज़र ना कुम अज़ाबन क़रीब, यौ म यंजुरुल मर उ मा कद् दमत यदाहु व यकूलुल् काफिरु या लैतनी कुन्तु तुराबा
    हमने तुम्हें क़रोब आ जाने वाले अज़ाब से डरा दिया है, जिस दिन आदमी उसको देख लेगा जो उसके हाथों ने आगे भेजा है, और काफ़िर कहेगा, काश मैं मिट॒टी होता।

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