38 सूरह साद हिंदी में पेज 4

सूरह साद हिंदी में | Surat Sad in Hindi

  1. क़ुल् हु-व न-बउन् अ़ज़ीम
    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये (क़यामत) एक बहुत बड़ा वाकि़या है
  2. अन्तुम् अ़न्हु मुअ्-रिज़ून
    जिससे तुम लोग (ख़्वाहमाख़्वाह) मुँह फेरते हो
  3. मा का-न लि-य मिन् अिल्मिम्-बिल्म-लइल्-अअ्ला इज़् यख़्तसिमून
    आलम बाला के रहने वाले (फरिश्ते) जब वाहम बहस करते थे उसकी मुझे भी ख़बर न थी
  4. इंय्यूहा इलय्-य इल्ला अन्नमा अ-न नज़ीरुम्-मुबीन
    मेरे पास तो बस वही की गयी है कि मैं (खु़दा के अज़ाब से) साफ-साफ डराने वाला हूँ
  5. इज़् क़ा-ल रब्बु-क लिल्मलाइ-कति इन्नी ख़ालिकुम् ब-शरम्-मिन् तीन
    (वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ
  6. फ़- इज़ा सव्वैतुहू व नफ़ख़्तु फ़ीहि मिर्रूही फ़-क़अू लहू साजिदीन
    तो जब मैं उसको दुरूस्त कर लूँ और इसमें अपनी (पैदा) की हुयी रूह फूँक दो तो तुम सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
  7. फ़-स-जदल् मलाइ-कतु कुल्लुहुम् अज्मअून
    तो सब के सब कुल फरिश्तों ने सजदा किया
  8. इल्ला इब्ली-स, इस्तक्ब-र व का-न मिनल्-काफ़िरीन
    मगर (एक) इबलीस ने कि वह शेख़ी में आ गया और काफिरों में हो गया
  9. क़ा-ल या इब्लीसु मा म-न-अ़-क अन् तस्जु-द लिमा ख़लक़्तु बि-यदय्-य, अस्तक्बर्-त अम् कुन्-त मिनल्-आ़लीन
    ख़ुदा ने (इबलीस से) फरमाया कि ऐ इबलीस जिस चीज़ को मैंने अपनी ख़ास कु़दरत से पैदा किया (भला) उसको सजदा करने से तुझे किसी ने रोका क्या तूने तक़ब्बुर किया या वाकई तू बड़े दरजे वालें में है
  10. का-ल अ-न ख़ैरुम्-मिन्हु ख़लक़्तनी मिन्-नारिंव्-व ख़लक़्तहू मिन् तीन
    इबलीस बोल उठा कि मैं उससे बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया और इसको तूने गीली मिट्टी से पैदा किया
  11. क़ा-ल फ़ख़्रुज् मिन्हा फ़-इन्न-क रजीम
    (कहाँ आग कहाँ मिट्टी) खु़दा ने फरमाया कि तू यहाँ से निकल (दूर हो) तू यक़ीनी मरदूद है
  12. व इन्-न अ़लै-क लअ्नती इला यौमिद्दीन
    और तुझ पर रोज़ जज़ा (क़यामत) तक मेरी फिटकार पड़ा करेगी
  13. क़ा-ल रब्बि फ़-अन्ज़िर्नी इला यौमि युब्अ़सून
    शैतान ने अज्र की परवरदिगार तू मुझे उस दिन तक की मोहलत अता कर जिसमें सब लोग (दोबारा) उठा खड़े किए जायेंगे
  14. क़ा-ल फ़-इन्न-क मिनल्-मुन्ज़रीन
    फरमाया तुझे एक वक़्त मुअय्यन के दिन तक की मोहलत दी गयी
  15. इला यौमिल्-वक़्तिल्-मअ्लूम
    वह बोला तेरी ही इज़्ज़त व जलाल की क़सम
  16. क़ा-ल फ़बिअिज़्ज़ति-क ल-उग़्वियन्नहुम् अज्मईन
    उनमें से तेरे ख़ालिस बन्दों के सिवा सब के सब को ज़रूर गुमराह करूँगा
  17. इल्ला अिबा-द-क मिन्हुमुल् – मुख़्लसीन
    खु़दा ने फरमाया तो (हम भी) हक़ बात (कहे देते हैं)
  18. क़ा-ल फ़ल्-हक़्क़ु वल्-हक़्-क़ अक़ूल
    और मैं तो हक़ ही कहा करता हूँ
  19. ल-अम्ल-अन्-न जहन्न-म मिन्-क व मिम्-मन् तबि-अ़-क मिन्हुम् अज्मईन
    कि मैं तुझसे और जो लोग तेरी ताबेदारी करेंगे उन सब से जहन्नुम को ज़रूर भरूँगा
  20. क़ुल् मा अस्अलुकुम् अ़लैहि मिन् अज़्रिंवू व मा अ-न मिनल्-मु-त- कल्लिफ़ीन
    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो तुमसे न इस (तबलीग़े रिसालत) की मज़दूरी माँगता हूँ और न मैं (झूठ मूठ) बनावट करने वाला हूँ
  21. इन् हु-व इल्ला ज़िक्रुल्-लिल्आ़लमीन
    ये (क़ुरान) तो बस सारे जहाँन के लिए नसीहत है
  22. व लतअ्-लमुन्-न न-ब-अहू बअ्-द हीन
    और कुछ दिनों बाद तुमको इसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी

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